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गुजरात के सांपों का जहर बनेगा ‘संजीवनी’, सरकार बनवा रही है ‘एंटी-स्नेक वेनम’

वलसाड़ के धरमपुर स्थित सर्प अनुसंधान केन्द्र ने लाइसेंस प्राप्त तेलंगाना की कंपनी को दिया जहर, जल्द राज्य सरकार को मिलेगी पहली खेल
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Gujarat Snake

फाइल फोटो।

Ahmedabad. गुजरात में सर्पदंश के उपचार के लिए राज्य सरकार राज्य में ही पाए जाने वाले जहरीले सांपों के जहर से क्षेत्र-विशिष्ट एंटी-स्नेक वेनम बनवा रही है। जल्द ही यह उपलब्ध होने के आसार हैं। यह सर्पदंश के उपचार में ‘संजीवनी’ साबित होगा।

राज्य के वलसाड जिले के धरमपुर में स्थित सर्प अनुसंधान केंद्र (स्नेक रिसर्च इंस्टीट्यूट-एसआरआइ) ने गुजरात में पाए जाने वाले सांपों की चार मुख्य जहरीली प्रजातियों- भारतीय नाग (इंडियन कोबरा), कॉमन करैत, रसेल्स वाइपर,सॉ-स्केल्ड वाइपर का लायोफिलाइज्ड (फ्रीड-ड्राइड यानी सूखा पाउडर स्वरूप) जहर तेलंगाना स्थित लाइसेंस प्राप्त एंटी-स्नेक वेनम बनाने वाली कंपनी को सौंपा है। यहां बना एंटी-स्नेक वेनम गुजरात को मिलने पर राज्य में सांप के डसने से होने वाली मौतों को कम करने में मदद मिलेगी। इससे वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों में 50 फीसदी की कमी करने के भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को पाने में मदद मिलेगी।

क्षेत्र विशेष एंटी-स्नेक वेनम किया जा रहा विकसित: मोढवाडिया

वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि राज्य में सांप के डसने से होने वाली मौतों को कम करने के लिए गुजरात सरकार ने अपना क्षेत्र-विशिष्ट (रीजन-स्पेसिफिक) एंटी-स्नेक वेनम विकसित करने का निर्णय किया है। वलसाड़ के धरमपुर स्थित सर्प अनुसंधान केंद्र में डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के तहत निकाले जाने वाले जहर से एंटी-स्नेक वेनम बनवाया जाएगा। इसके लिए गत सप्ताह गुजरात वानिकी अनुसंधान फाउंडेशन (जीएफआरएफ) के अधीनस्थ कार्यरत सर्प अनुसंधान केंद्र ने तेलंगाना की कंपनी मेसर्स विन्स बायोप्रोडक्ट्स लिमिटेड को यह जहर सौंपा है। जो एंटी स्नेक वेनम बनाएगी।

गुजरात को जल्द मिलेगी पहली खेप

मोढवाडिया के अनुसार गुजरात वन विभाग ने इस कंपनी को 33.37 ग्राम भारतीय नाग (इंडियन कोबरा) का जहर, 2.67 ग्राम कॉमन करैत, 30.82 ग्राम रसेल्स वाइपर और 1.71 ग्राम सॉ-स्केल्ड वाइपर का जहर सौंपा है। कंपनी ने गुजरात के क्षेत्र-विशिष्ट एंटी-स्नेक वेनम बनाना शुरू किया है। इस वैक्सीन की पहली खेप गुजरात को जल्द ही मिलने की संभावना है।गांधीनगर स्थित गुजरात वानिकी अनुसंधान फाउंडेशन के निदेशक एस.के. श्रीवास्तव ने कहा कि देशभर में वन्यजीवों के हमलों में होने वाली लोगों की मौत और सांप के डसने से जान गंवाने के आंकड़ों में बड़ा अंतर है। स्थानीय सांप के जहर से बना एंटी स्नेक वेनम उपचार को प्रभावी बनाता है।

स्थानीय सांपों के जहर का एंटी स्नेक वेनम उपयोगी

सर्प अनुसंधान केंद्र के उपाध्यक्ष और सर्पदंश के उपचार के लिए प्रसिद्ध डॉ. डी.सी. पटेल ने कहा कि सर्पदंश के उपचार में मुख्य चुनौती यह है कि अलग-अलग क्षेत्र के हिसाब से सांप का जहर भी भिन्न-भिन्न होता है। ऐसे में यह संस्थान पूरे गुजरात में पाए जाने वाले जहरीले सांपों की प्रजातियों से जहर एकत्रित करने पर ध्यान केंद्रित करता है, ताकि क्षेत्र-विशिष्ट एंटी स्नेक वेनम विकसित किया जा सके। इस केन्द्र में गुजरात की मुख्य प्रजातियों के 471 जहरीले सांप हैं। तमिलनाडु में ‘इरुला स्नेक कैचर्स इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव सोसाइटी’ के बाद एंटी-वेनम के उत्पादन के लिए जहर निकालने वाला यह देश का दूसरा संस्थान है।