5 जुलाई 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गुजरात में स्ट्रोक के मरीजों में 26.71 फीसदी वृद्धि

जिलावार आंकड़ों में अहमदाबाद सबसे आगे रहा, जहां इस वर्ष 1,759 मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बाद सूरत में 784, राजकोट में 469, भावनगर में 431 तथा वडोदरा में 421 मरीजों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
2 min read
Google source verification
108 Emergency Ambulance

फाइल फोटो

Ahmedabad news गुजरात में स्ट्रोक (ब्रेन स्ट्रोक/पैरालिसिस अटैक) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बनती जा रही है। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में राज्यभर में स्ट्रोक के मरीजों की संख्या पिछले साल की तुलना में 26.71 फीसदी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक के मामलों में शुरुआती कुछ मिनट और पहला घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर उपचार मिलने से न केवल मरीज की जान बचाई जा सकती है, बल्कि स्थायी विकलांगता के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

आपातकालीन 108 एम्बुलेंस सेवा के जनवरी से जून-2026 के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में 7,964 स्ट्रोक मरीजों को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि वर्ष 2025 की समान अवधि में यह संख्या 6,285 थी। यानी छह माह में ऐसे मामलों में 26.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कई अन्य जिलों में भी स्ट्रोक के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि

सबसे अधिक वृद्धि मोरबी जिले में दर्ज की गई, जहां मामलों में 217 प्रतिशत का उछाल आया। इसके अलावा पंचमहल में 158 प्रतिशत, नर्मदा में 117 प्रतिशत, देवभूमि द्वारका में 96.83 प्रतिशत, कच्छ में 85.71 प्रतिशत तथा पाटण में 74.60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

विशेषज्ञों के अनुसार चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा पड़ना, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी महसूस होना, बोलने में कठिनाई होना, शब्द स्पष्ट न निकलना या शरीर का संतुलन बिगड़ना स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे संकेत मिलते ही बिना समय गंवाए मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना चाहिए।

108 एम्बुलेंस सेवा, गुजरात के जनसंपर्क अधिकारी विकास बिहानी ने बताया कि स्ट्रोक के मामलों में हर मिनट कीमती होता है। सेवा का उद्देश्य मरीज को जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल तक पहुंचाना है, जहां तत्काल विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देते ही बिना किसी देरी के 108 एम्बुलेंस सेवा का उपयोग करें, क्योंकि समय पर इलाज ही मरीज की जान बचाने और स्थायी नुकसान से बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।