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GUJARAT: आमदिनों की तुलना में धुलंडी पर 30 फीसदी तक बढ़ सकती हैं इमरजेंसी घटनाएं

अहमदाबाद में भी करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ने के आसार - पिछले वर्ष होली-धुलंडी के दिन बढ़ी इमरजेंसी के आधार पर जताई संभावना

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Gujarat गुजरात में होली-धुलंडी पर्व के दौरान आमदिनों के मुकाबले स्वास्थ्य संबंधित इमरजेंसी (आपातकालीन) मामले बढ़ने की आशंका जताई गई है। गुजरात इमरजेंसी 108 एम्बुलेंस सेवा ने वर्ष 2024 के आधार पर आशंका जताई गई है कि आम दिनों की तुलना में शुक्रवार (धुलंडी त्योहार) के दिन 29.88 फीसदी तक आपातकालीन मामले बढ़ सकते हैं।

108 एम्बुलेंस के मुख्य संचालन अधिकारी (सीओओ) जशवंत प्रजापति के अनुसार गुजरात में आमदिनों में इमरजेंसी मामलों का औसत 3735 है। धुलंडी पर शुक्रवार को इस तरह के मामले 29.88 फीसदी तक बढ़कर 4851 तक पहुंच सकते हैं। मुख्य रूप से सड़क दुर्घटनाओं और गैर-वाहन दुर्घटनाएं बढ़ सकती हैं।

गैरवाहन हादसों में 129, वाहन हादसों में 89 फीसदी वृद्धि संभव

आमदिनों में गैर वाहन से जुड़े 395 इमर्जेंसी मामले सामने आते हैं। धुलंडी के दिन ये मामले 907 तक पहुंच सकते हैं, यह वृद्धि 129 फीसदी अधिक है। इसी तरह राज्य में वाहन हादसों का आमदिनों का औसत 458 है ,जो शुक्रवार को धुलंडी पर 911 तक हो सकते हैं।। यह 89 फीसदी अधिक है। पेटदर्द के मामलों में 21 फीसदी, हृदय संबंधी मामलों में लगभग छह फीसदी, विषाक्त भोजन संबंधित मामलों में भी 47 फीसदी तक की वृद्धि होने के आसार हैं।

इन जिलों में ज्यादा मामले

सीओओ प्रजापति के अनुसार धुलंडी के दिन आपातकालीन मामलों में 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हो सकती हैं, उनमें अरवल्ली, दाहोद, महिसागर, पंचमहाल, पोरबंदर, अहमदाबाद, अमरेली, आणंद, भरुच, बोटाद, भावनगर, छोटा उदेपुर, खेडा, मोरबी, नर्मदा, नवसारी, पोरबंदर, सूरत, सुरेंद्रनगर, डांग एवं वलसाड जिले शामिल हैं।

मोरबी, सूरत में सबसे अधिक इमरजेंसी की आशंका

इमरजेंसी 108 एम्बुलेंस के संपर्क में पिछले वर्ष जो मामले आए थे उनके आधार पर कहा जा सकता है कि इस वर्ष सबसे अधिक 65 फीसदी मामले मोरबी में दर्ज हो सकते हैं। सामान्य दिनों में मोरबी जिले में इमरजेंसी का औसत 52 है, जो शुक्रवार को बढ़कर 86 तक पहुंच सकता है, यह 65 फीसदी अधिक है। इसी तरह सूरत में आमदिनों में सामने आने वाले 370 की तुलना में शुक्रवार को यह संख्या 593 (60 फीसदी) तक हो सकती है। अहमदाबाद में आमदिनों में 808 मामलों की संख्या में 1006 तक पहुंच सकती है जो 24.50 फीसदी अधिक है।