16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अमूल डेयरी के ड्राइवर का बेटा बना एसोसिएट मैनेजर

Gujarat, anand, Amul driver son, IIMA, Associate manager, dairy, bihar, आईआईएम-अहमदाबाद से प्रबंधन की पढ़ाई के बाद हितेश ने गुरूग्राम में पाई नौकरी, बिहार से 30 वर्ष पहले हितेश के पिता आए थे आणंद, पिता ने पहले की सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी की, बाद में ड्राइवर बने

2 min read
Google source verification
अमूल डेयरी के ड्राइवर का बेटा बना एसोसिएट मैनेजर

अमूल डेयरी के ड्राइवर का बेटा बना एसोसिएट मैनेजर

बुरहान पठाण/नगेन्द्र सिंह

आणंद. अमूल डेयरी में ड्राइवर के रूप में सेवा देने वाले पंकज सिंंह के बेटे हितेश सिंह ने एक नामी कंपनी में एसोसिएट मैनेजर की नौकरी पाई है। हितेश ने अपनी मेहनत और लगन की बदौलत कैट में अच्छा स्कोर (96.12) कर पहले तो भारतीय प्रबंध संस्थान-अहमदाबाद (आईआईएम-ए) में प्रवेश पाया। यहां से प्रबंधन के गुर सीखने के बाद हाल ही में हुए प्लेसमेंट में मिले कई ऑफर में से उन्होंने गुरूग्राम (हरियाणा) की एक कंपनी में जॉब स्वीकारी।
हितेश के पिता पंकज सिंह मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं। 30 वर्ष वर्ष पहले वे बिहार से आणंद आए थे। पहले वे सिक्युरिटी गार्ड के रूप में नौकरी करते थे। इसके बाद उन्होंने ड्राइविंग सीखी और वर्ष 2007 में अमूल डेयरी में काम पर लगे।
14 सालों से वे आणंद में अमूल डेयरी (गुजरात कॉ-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड) के प्रबंध निदेशक आर.एस.सोढ़ी के ड्राइवर के रूप में कार्यरत हैं। हितेश की मां सरिताबेन गृहिणी हैं।
आणंद शहर के परीख भुवन इलाके में स्थित मातोश्री सोसायटी निवासी हितेश बताते हैं कि उनकी मां और पिता दोनों ने दसवीं तक की पढ़ाई की है। लेकिन उनकी शिक्षा को लेकर वह काफी सजग और प्रयासरत रहे। उन्हें कभी कोई कमी नहीं होने दी। उनकी प्रेरणा के चलते ही वे यह मुकाम हासिल कर पाए हैं।
हितेश ने बताया कि आईआईएम-ए के प्लेसमेंट में उन्हें छह कंपनियों से नौकरी का ऑफर मिला था। उनके ऑफर और उसमें दिए गए कार्य का मूल्यांकन करने के बाद उन्होंने गुरूग्राम में स्थित कंट्री डिलाइट कंपनी में एसोसिएट मैनेजर (न्यू प्रोडक्ट डेवलपमेंट) को चुना। इसमें उन्हें नए प्रोडक्ट को डवलप करने और अन्य काफी चीजें सीखने को मिलेंगी।

डेयरी क्षेत्र में काम करने का था सपना
आणंद कृषि विवि से स्नातक में दो स्वर्ण पदक पाने वाले हितेश बताते हैं कि वे शुरूआत से ही डेयरी क्षेत्र में ही काम करना चाहते थे। इसी के लिए उन्होंने बीएससी भी डेयरी साइंस में की और आईआईएम-ए में एमबीए भी फूड एंड एग्री बिजनेस मैनेजमेंट में किया है। उनका ध्येय डेयरी क्षेत्र में नए आयामों को हासिल करना है।

आईआईएम-ए जाने पर देखा था पुत्र को पढ़ाने का सपना
पिता पंकज सिंह बताते हैं कि वे 30 साल पूर्व रोजी रोटी की तलाश में आणंद आए थे। पहले 600 रुपए में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की फिर ड्राइविंग सीखी और 14 सालों से अमूल में ड्राइवर के रूप में कार्यरत हैं। कार्यक्रमों के सिलसिले में अमूल के एमडी को आईआईएम-ए लेकर जाते हुए सपना देखा था कि पुत्र को भी आईआईएम-ए में पढ़ाएंगे। सफल व्यक्ति बनाएंगे। आज वह सपना पूरा हो गया है। पढ़ाई के बाद उसने अच्छा काम भी पाया है।
आणंद में ही जन्म लेने वाले हितेश गुजराती माध्यम के विद्यार्थी रहे। बिना ट्यूशन के पढ़ाई की। 12वीं बोर्ड परीक्षा में भी उसे 97 पर्सेन्टाइल अंक मिले थे।

सामान्य परिवार के इस विद्यार्थी ने मेहनत व लगन के बूते नौकरी पाई
हितेश एक होशियार विद्यार्थी है। उसमें सीखने की ललक है। वह हमेशा उनसे और डेयरी क्षेत्र के अन्य लोगों से मार्गदर्शन प्राप्त करता रहता है। सामान्य परिवार के इस विद्यार्थी ने मेहनत और लगन के बूते प्रतिष्ठित संस्थान में नौकरी पाई है। यह गौरव की बात है।
-आर एस सोढ़ी, प्रबंध निदेशक, जीसीएमएमएफ (अमूल) डेयरी