
Gujarat: डांग की अंबिका, पूर्णा, गीरा, खापरी नदियों, प्रशाखाओं पर 24 गांवों में बनेंगे चेक डैम
गांधीनगर. मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने दक्षिण गुजरात के दुर्गम आदिवासी जिले डांग में वनवासी किसानों को सिंचाई की व्यापक सुविधा मुहैया कराने के लिए डांग क्षेत्र की 4 बड़ी नदियों और उनकी प्रशाखाओं पर 24 बड़े हाइड्रॉलिक स्टोरेज स्ट्रक्चर चेक डैम बनाने के लिए 26 करोड़ रुपए के कार्यों को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। डांग जिले की पूर्णा, गीरा, खापरी और अंबिका नदियों तथा उनकी प्रशाखाओं पर आहवा, सुबीर और वघई तहसील के 24 गांवों में इन चेक डेमों का निर्माण किया जाएगा।
डांग जिले की जटिल भौगोलिक स्थिति के कारण वहां पर जल संचयन की सुविधा न्यूनतम है। यह पूरा क्षेत्र पहाड़ी और ढलान वाला होने के कारण पानी के बह जाने से मानसून के बाद जमीन में जलस्तर नीचे चला जाता है और जल संग्रहण नहीं हो पाता। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण बड़ी योजनाओं को यहां क्रियान्वित करना लगभग असंभव है।
रूपाणी ने आदिवासी किसानों की इस व्यथा को समझकर उसका सुचारू उपाय ढूंढऩे के लिए अधिकारियों को दिए गए निर्देश के चलते संबंधित विभाग के अधिकारियों ने डांग जाकर संबंधित स्थलों का दौरा किया। इन कार्यों की संभावनाओं की पड़ताल के बाद अधिकारियों की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री ने मंजूरी की मुहर लगाई है। अंबिका, खापरी नदी तथा उसकी प्रशाखाओं (डिस्ट्रीब्यूटरी) पर जो काम शुरू किए जाएंगे उसमें वघई तहसील के आहेरडी, हुंबापाडा, बोरदहाड, शिवारीमाल, चीरापाडा और सुपदहाड तथा आहवा के बीलमाल, डोन, पांडवा और वाकी (उमरिया) गांवों में कुल 1,070.87 लाख रुपए की लागत से 10 चेक डैम हाइड्रोलिक स्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा।
इसके अलावा पूर्णा, गीरा और खापरी नदी और उसकी प्रशाखाओं पर जो काम शुरू किया जाएगा उनमें वघई के खोपरीआंबा, वांकन, कालीबेल, पांढरमाल तथा सुबीर तहसील के हारपाडा, गारखड़ी, डुमर्या, काटीस, धुलधा तथा आहवा के धवलीदोड और नांदनपेडा गांवों में कुल 1,603.16 लाख रुपए के खर्च से 14 हाइड्रॉलिक स्ट्रक्चर चेक डैम निर्मित किए जाएंगे।
इन योजनाओं के पूरा होने से बरसाती पानी का अच्छी मात्रा में संग्रहण होने के कारण डांग के आदिवासी किसानों को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिलेगी। किसान ग्रीष्मकालीन फसल भी ले सकेंगे तथा खेत पैदावार में बढ़ोतरी होगी, इससे आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
बारिश की अनियमितता के दौरान संग्रहित जल से फसल को बचाया जा सकेगा, मवेशियों को पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी तथा चेक डैम निर्माण से जल संग्रहण के परिणामस्वरूप आसपास के क्षेत्र में भूगर्भ जलस्तर ऊंचा उठने से किसानों को सिंचाई की परोक्ष सुविधाएं प्राप्त होंगी।
Published on:
31 Jan 2020 11:16 pm
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