
VIDEO: गुजरात में मौजूद हैं लुप्तप्राय प्रजाति के चार मादा ग्रेड इंडियन बस्टर्ड
अहमदाबाद. लुप्त होने की कगार पर पहुंची प्रजातियों में शामिल ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) कि जिसे गुजरात में घोराड़ और राजस्थान में गोडावण के नाम से जाना जाता है। गुजरात में इस लुप्तप्राय प्रजाति के चार मादा पक्षी आज भी मौजूद हैं।
यह आंकड़े राज्य सभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में केन्द्र सरकार ने राज्यसभा में पेश किए जवाब में दिए गए हैं।
सदन में केन्द्र सरकार ने बताया कि गुजरात सरकार से प्राप्त सूचना के तहत गुजरात के कच्छ जिले में स्थित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड(जीआईबी) हैबिटेट (पर्यावास) (कच्छ घोराड़ सेंचुरी) में नियमित रूप से चार मादा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानि मादा घोराड़ को देखा गया है।
इस लुप्तप्राय प्रजाति को बचाने, इनकी संख्या बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार का वन, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र सरकार के वन विभागों के सहयोग से प्रयासरत है। भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून से तकनीकी सहयोग लेकर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण प्रजनन के संबंध में कार्य किया जा रहा है। इनके प्रजनन व संरक्षण के लिए ५ साल की अवधि के लिए ३३.८५ करोड़ की एकीकृत योजना स्वीकृत की है। इस पक्षी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम १९७२ की अनुसूची-एक में सूचीबद्ध किया गया है। जिससे इसके शिकार किए जाने से इसे सुरक्षा दी गई है। इतना ही नहीं इसे प्रवासी प्रजातियों के कन्वेंशन के परिशिष्ट एक में शामिल किया गया है। गांधीनगर में आयोजित प्रवासी पक्षियों के 13वें कन्वेंशन में पक्षकार देशों के सम्मेलन का शुभंकर भी बनाया गया था।
राजस्थान से नर घोराड़ लाकर संवर्धन करे सरकार
गोहिल ने कहा कि गुजरात के कच्छ में स्थित घोराड़ सेंचुरी में चार मादा घोराड़ पक्षी देखने को मिल रहे हैं। यह हमारे लिए गौरव की बात है। लेकिन यह सभी मादा हैं। ऐसे में इस पक्षी के विकास के लिए जरूरी है कि गुजरात सरकार पड़ोस की राजस्थान सरकार के पास से एक नर (पुरुष) घोराड़ (मेल ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) गुजरात लेकर आए। उसके जरिए हम गुजरात के गौरव घोराड़ पक्षी की आबादी को बढ़ा सकते हैं। इसका विकास कर सकते हैं। इन्हें बचा सकते हैं। इससे गुजरात व कच्छ का गौरव बढ़ेगा।
राज्य सरकार पर अनदेखी का आरोप
गोहिल ने गुजरात से घोराड़ पक्षी के लुप्त होने को लेकर राज्य सरकार पर घोराड़ के संरक्षण में अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकार ने इस पक्षी को बचाने व इसके संरक्षण के लिए कच्छ में घोराड़ सेंचुरी बनाई। कई प्रयास किए, लेकिन कुछ सालों में राज्य सरकार कुछ उद्योगपतियों के लाभ के लिए इनके संरक्षण, इनके विकास की अनदेखी कर रही है।
कोटा में बनेगा जीआईबी संरक्षण प्रजनन केंद्र
केन्द्र सरकार की ओर से सदन में दिए जवाब में बताया कि राजस्थान के कोटा जिले में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए संरक्षण प्रजनन केन्द्र की स्थापना की जाएगी। इसके लिए एक जगह को भी चिन्हित किया गया है। मौजूदा समय में राजस्थान में साम, जैसलमेर में कैप्टिव पक्षियों के लिए इन्क्यूबेटर, हैचर, चिक रिअरिंग तथा पर्यावास (हैबिटेट) सुविधा के साथ एक सेटेलाइट प्रजनन केंद्र है। साम जैसलमेर स्थित सेटेलाइट प्रजनन केंद्र में १६ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड चूजों (जंगल से एकत्रित अंडों से कृत्रिम रूप से निकले) का पालन किया जा रहा है।
राजस्थान में १२५ ही गोडावण!
ज्ञात हो कि घोराड़ (गोडावण यानि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) राजस्थान का राज्य पक्षी है। राजस्थान वन विभाग के अनुसार १९७८ में राजस्थान में इस पक्षी की संख्या ७४५ थी, जो २००१ में घटकर ६०० रह गई। २००८ में इनकी संख्या घटकर ३०० रह गई है। २०१३ में यह संख्या १२५ ही रह गई।
Published on:
11 Feb 2022 09:31 pm

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