
मूंगफली का बंपर उत्पादन, फिर भी तेल में राहत के कम आसार
नगेन्द्र सिंह
अहमदाबाद. गुजरात में इस वर्ष मूंगफली का बंपर उत्पादन होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। इसके बावजूद लोगों को मूंगफली (सींग) तेल की आसमान छूती कीमतों से राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
केन्द्र सरकार की ओर से खाद्य तेलों के आयात शुल्क में इस वर्ष अब छठी बार राहत देने और कच्चे पाम तेल, सोयाबीन, सूरजमुखी तेल पर बुनियादी सीमा शुल्क खत्म करने के बावजूद मूंगफली तेल की कीमत 2500-2600 रुपए प्रति 15 किलो पर बनी हुई हैं।
हालांकि स्टॉक सीमा लागू करने के केन्द्र सरकार के राज्यों को दिए निर्देश का हल्का असर हुआ है। इससे दीपावली त्योहार पर दाम में मामूली गिरावट देखी गई है। लेकिन पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम के बीच खाद्य तेलों की बढ़ी कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है।
38.55 लाख मीट्रिक टन मूंगफली उत्पादन का अनुमान
सॉलवेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार गुजरात में वर्ष 2021-22 में 38.55 लाख मीट्रिक टन मूंगफली का उत्पादन होने के आसार हैं। देश में सबसे ज्यादा मंूगफली यहीं होती हैं। राज्य में 19.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की बुवाई हुई है। बीते साल 20.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की बुवाई हुई थी और करीब 35.45 मीट्रिक टन पैदावार हुई थी। यानि इस बार करीब 8 फीसदी से ज्यादा पैदावार होगी। हालांकि इसमें से मूंगफली का तेल 12-13 लाख मीट्रिक टन ही निकल पाएगा शेष मूंगफली खाने में उपयोग में ली जाएगी।
जरूरत का 60 फीसदी खाद्य तेल होता है आयात
खाद्य तेल मिल एसोसिएशन से जुड़े एक उद्यमी व व्यापारी का कहना है कि खाद्य तेलों का बाजार भी अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर है। क्योंकि भारत जरूरत का 60 फीसदी खाद्य तेल आयात करता है। देश में खाद्य तेलों की खपत 250 लाख टन है। इनमें सिर्फ 100 लाख टन का पैदावार होता है। शेष 150 लाख टन (पाम, सोया, सूरजमुखी) विदेशों से आयात करना पड़ता है। इसका असर है कि खाद्य तेलों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार, चीन की मांग का है असर
इस साल बीते वर्ष से गुजरात में मूंगफली की बंपर (करीब 8 फीसदी ज्यादा) पैदावार का अनुमान है। जहां तक मंूगफली तेल की बढ़ी कीमतों में राहत की बात है तो उसके आसार कम हैं। इसका कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम तेल, सूरजमुखी तेल, सोयाबीन तेलों की कीमतें बहुत ज्यादा हैं। जिससे मूंगफली व कपास तेल की कीमत भी बढ़ी हैं। मूंगफली तेल की खरीदी में चीन से बीते साल से मांग बढ़ी है। बीते साल करीब 2.25 लाख टन सींग तेल (मूंगफली का तेल) चीन ने भारत से खरीदा था। इस साल भी अच्छी पूछताछ है। जिससे कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार और चीन की मांग पर निर्भर करेंगी।
-समीर शाह, अध्यक्ष, गुजरात स्टेट एडिबुल ऑयल एंड ऑयल सीड्स एसोसिएशन
किसान की हालत फिर भी खस्ता
मूंगफली तेल की कीमत बेशक आसमान छू रही है लेकिन किसानों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा। इस साल अच्छी पैदावार है तो सरकार स्टॉक मर्यादा लागू कर रही है। इससे किसानों को जो 20 किलोग्राम मूंगफली की कीमत 12००-13०० रुपए बाजार में मिल रही थी। वह घटकर 1000 रुपए रह गई है। जबकि समर्थन मूल्य 1110 रुपए ही घोषित किया है। समर्थन मूल्य पर खरीदी केवल 25 फीसदी ही हो पाती है। ज्यादातर खरीदार ऑयल मिल मालिक और व्यापारी हैं। ऐसे में किसानों को जो फायदा हो रहा था अब वह भी नहीं हो रहा।
-दिलीप सखिया, अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, राजकोट
तीन दिनों में हुई 100 रुपए की गिरावट
बीते वर्ष इन दिनों मूंगफली तेल की कीमत 1800 रुपए प्रति 15 किलो थी तो फिलहाल इसकी कीमत 2520 रुपए प्रति 15 किलो है। कुछ दिनों इसका दाम 2600 के पार पहुंच गया था। बीते तीन दिनों में कीमत में 100 रुपए की कमी देखी गई है। सबसे महंगा सरसों का तेल है। जिसकी कीमत प्रति 15 किलो 3050 रुपए है। उत्तरप्रदेश, व राजस्थान से सरसों का तेल गुजरात बाजार में नहीं आ पा रहा।
-अनिल गुप्ता, ऑयल व्यापारी, अहमदाबाद
रसोई का बजट बिगड़ा
कोरोना की मार के चलते आर्थिक स्थिति गड़बड़ाई है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के साथ खाद्य तेल आसमान छू रहे हैं। आज मूंगफली व कपास के तेल की एक समान हो गई है। सरसों का तेल उससे भी महंगा है। ऐसे में रसोई का पूरा बजट गड़बड़ा गया है।
-सुनीता राजपूत, अहमदाबाद
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Published on:
28 Oct 2021 10:25 pm
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