
वेद, पुराण, उपनिषद भी पढ़ाएगी जीटीयू
अहमदाबाद. गुजरात तकनीकी विश्वविद्यालय (जीटीयू) में इंजीनियरिंग, फार्मेसी, प्रबंधन के साथ अब भारतीय वेद, पुराण और उपनिषदों का भी अध्ययन कराया जाएगा। प्राचीन वास्तुकला, भारतीय संस्कृति, कला, अभिजात साहित्य की भी शिक्षा दी जाएगी।
जीटीयू ने पूणे के भीष्म इंडिक फाउंडेशन के साथ मिलकर भारतीय ज्ञान व्यवस्था से जुड़े 12 ऑनलाइन प्रमाण-पत्र कोर्स शुरू किए हैं। जीटीयू कुलपति डॉ. नवीन शेठ, भीष्म इंडिक फाउंडेशन के निदेशक क्षितिज पाटुकुले ने मंगलवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की।
डॉ.शेठ ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को बहुविध विषयों की शिक्षा व भारतीय कला, संस्कृति, वेद, पुराणों की वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना है। विदेशों में भारतीय संस्कृति, भाषा, साहित्य, वास्तुकला से जुड़े पाठ्यक्रम चल रहे हैं, जबकि हम इसमें पीछे नजर आ रहे हैं। इसे देखते हुए तीन महीने के 12 अलग-अलग अल्पकालिक प्रमाण-पत्र कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। इसे जीटीयू के धरोहर केन्द्र के जरिए भीष्म स्कूल ऑफ इंडिक स्टडी की मदद से संचालित किया जाएगा। सुबह-शाम के बैच रहेंगे ताकि नौकरपेशा व्यक्ति भी इसे कर सके। आयु की कोई बाध्यता नहीं है। रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं। देश ही नहीं विदेशों से भी लोग इसमें रुचि दिखा रहे हैं। इसकी फीस में जीटीयू के विद्यार्थियों को कुछ राहत भी दी जाएगी। पढ़ाई और परीक्षा दोनों ऑनलाइन होंगीं।
इस दौरान कुलसचिव डॉ. के एन खेर, धरोहर केन्द्र की प्रभारी प्रो.सारिका श्रीवास्तव व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
मणिपुर सीएम की पत्नी ने किए हैं तीन कोर्स
भीष्म इंडिक फाउंडेशन के निदेशक क्षितिज पाटुकुले ने बताया कि जीटीयू देश ऐसा पहला विवि है जिसने भारतीय संस्कृति, वेद, पुराण, उपनिषदों की शिक्षा प्लेटफॉर्म दिया है। ऑनलाइन होने से ज्यादा लोगों तक इसकी पहुंच बनेगी। उन्होंने कहा कि उनके पूणे केन्द्र से मणिपुर सीएम एन बीरेन सिंह की पत्नी नीतिदेव ने तीन कोर्स किए हैं, जिसमें वेद, उपनिषद अध्ययन शामिल है। देश-विदेश से काफी मांग आ रही है। इसे करने के बाद रोजगार के भी अवसर हैं।
ये हैं 12 कोर्स
वेदों का अध्ययन, प्राचीन वास्तुकला अध्ययन, पुराणों का अध्ययन, प्राचीन भारतीय कलाओं का अध्ययन, उपनिषदों का अध्ययन, कौटिल्य का राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र, धर्म और सम्प्रदायों का अध्ययन, भारतीय प्राचीन अभिजात साहित का अध्ययन, प्राचीन भारतीय संस्कृति और परंपरा का अध्ययन, प्राचीन भारतीय विज्ञन और तंत्रज्ञान का अध्ययन, प्राचीन भारतीय राजाओं और साम्राज्यों का अध्ययन, भारतीय संस्कृति और सभ्यता के वैश्विक पदचिन्हों का अध्ययन शामिल हैं।
फार्मेसी में भी तीन अल्पकालिक कोर्स
शेठ ने बताया कि फार्मेसी में तीन माह के कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। जिसमें सर्टिफिकेट कोर्स फार्मास्युटिकल क्वालिटी सिस्टम एंड ऑडिट कम्पलेन, रिवर्स इंजीनियरिंग एप्रोचिस इन फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट डेवलपमेंट, गुड मैन्युफेक्चरिंग प्रेक्टिस इन बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स शामिल हैं।
Published on:
24 Aug 2021 10:41 pm
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