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गुजरात: अब सार्वजनिक कार्यालयों, जगहों पर गुजराती भाषा में नोटिस, सूचना बोर्ड अनिवार्य

Gujarat, Gujarati language sign board, notice mandatory, 8 municipal city, harsh sanghvi, school-college, hotel, मातृभाषा के प्रचार-प्रसार को सरकार का अहम निर्णय, मातृभाषा दिवस से पूर्व गुजरात खेलकूद, युवा एवं सांस्कृतिक गतिविधि विभाग का अहम निर्देश, 8 महानगर पालिकाओं से शुरू होगा क्रियान्वयन, शहरों में प्रसार जरूरी  

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गुजरात: अब सार्वजनिक कार्यालयों, जगहों पर गुजराती भाषा में नोटिस, सूचना बोर्ड अनिवार्य

गुजरात: अब सार्वजनिक कार्यालयों, जगहों पर गुजराती भाषा में नोटिस, सूचना बोर्ड अनिवार्य

अहमदाबाद. गुजरात की मातृभाषा-गुजराती का महत्व बढ़ाने और उसके प्रचार-प्रसार को गति देने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम निर्णय किया है। जिसके तहत राज्य में अब सार्वजनिक कार्यालयों, जगहों पर नोटिस, सूचना बोर्ड, दिशा-निर्देश गुजराती भाषा में अनिवार्य रूप से लिखने का निर्देश दिया है। मातृभाषा दिवस 21 फरवरी से पहले गुजरात के खेलकूद, युवा एवं सांस्कृतिक गतिविधि विभाग की ओर से यह अहम निर्देश जारी किए गए हैं।
18 फरवरी 2022 को इसका परिपत्र (अधिसूचना) भी जारी कर दी है। जिसमें राज्य के आठ महानगर पालिकाओं-अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, राजकोट, जामनगर, भावनगर, जूनागढ़ और गांधीनगर से इसके क्रियान्वयन की शुरुआत करने का निर्देश दिया गया है।
परिपत्र में कहा गया है कि राज्य के ग्रामीण इलाके में तो बहुतायत प्रमाण में गुजराती भाषा का उपयोग हो रहा है, लेकिन शहरों में बढ़ते शहरीकरण के बीच गुजराती भाषा का प्रचार-प्रसार और ज्यादा हो यह जरूरी है, जिससे यह निर्णय किया गया है।
विभाग की ओर से जारी परिपत्र में कहा है कि राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों, परिसरों, सार्वजनिक स्थलों पर जहां-जहां नाम, सूचना, दिशा-निर्देश, जानकारी लिखी गई हो उस सभी को हिंदी/अंग्रेजी के साथ-साथ गुजराती भाषा में भी अनिवार्य रूप से लिखना होगा।

स्कूल-कॉलेज, होटल, बगीचों में भी अमल
सरकारी परिसरों के अलावा निजी मालिकी की सार्वजनिक जगहों कि जिसमें स्कूल, कॉलेज, सिनेमाघर, नाट्यगृह (थियेटर), बैंक्वेट हॉल, होटल, रेस्टोरेंट, कैफे, बैंक, पुस्तकालय (लाइब्रेरी), बाग-बगीचे इन जगहों पर भी नाम, सूचना, जानकारी, दिशा निर्देश सभी हिंदी/अंग्रेजी भाषा के साथ गुजराती भाषा में भी लिखना अनिवार्य है।

सरकारी विभाग के प्रमुख, मनपायुक्त की जिम्मेदारी
सरकारी कार्यालयों में इस निर्देश के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय के प्रमुख की रहेगी। मनपा इलाकों के बाग-बगीचे, पुस्तकालय व अन्य परिसरों पर अमल की जिम्मेदारी संबंधित महानगर पालिका के आयुक्त, शहरी विकास प्राधिकरण क्षेत्र में उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी और शेष जगहों पर जिला कलक्टरों की रहेगी।

गुजराती भाषा नहीं, गौरवाशाली साहित्य संस्कृति
परिपत्र में कहा गया है कि गुजराती भाषा केवल एक भाषा नहीं बल्कि विशाल गौरवशाली इतिहास और समृद्ध साहित्य रखने वाली संस्कृति है। एक मई 1960 को गुजरात राज्य की स्थापना हुई तब से ही राज्य की राजभाषा गुजराती के साथ हिंदी भी रखी गई है। एक मई 1965 को सचिवालय, जिला, तहसील स्तर पर गुजराती भाषा में कार्य के निर्देश दिए थे। इसके अलावा गुजराती भाषा के प्रचार प्रसार के लिए रामलाल परीख समिति गठित की थी। इस समिति ने राज्य सरकार का प्रशासन गुजराती भाषा में चलाने की सिफारिश की है।

शहरों में गुजराती भाषा को बढ़ाने की पहल
गुजरात के 18 हजार से ज्यादा गांवों में आज भी केवल गुजराती भाषा का उपयोग हो रहा है। कई लोग रोजगार के लिए आकर शहरों में बस रहे हैं। ऐसे में शहरों में भी गुजराती भाषा की परंपरा बरकरार रहे, उसका प्रचार-प्रसार हो इसलिए 8 मनपा क्षेत्रों में सरकारी-निजी कार्यालयों, दुकानों में गुजराती भाषा में भी जानकारी दी जाए, नोटिस लगाने का निर्णय किया है। सभी से अपील है कि वे इसे जवाबदारी समझकर सहयोग दें।
-हर्ष संघवी, मंत्री, खेलकूद, युवा एवं सांस्कृतिक गतिविधि विभाग