
सौर ऊर्जा के उपयोग से ऊर्जा संरक्षण में गुजरात दे रहा महत्वपूर्ण योगदान
रोहित सांगाणी
राजकोट. सृष्टिचक्र की सुगम गति और हर जीव के कल्याण के लिए ऊर्जा का सदुपयोग व संरक्षण आवश्यक है, इसलिए 1991 से हर साल 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया जा रहा है।
ऊर्जा शब्द की उत्पत्ति मूल ग्रीक भाषा के एनर्जिया शब्द से हुई। पृथ्वी, सौरमंडल व ब्रह्मांड के संचालन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। गति, ऊष्मा, विद्युत, रासायनिक, नाभिकीय ऊर्जा इसके स्वरूप हैं। सामान्यतया पुन: प्राप्य ऊर्जा और पुन: अप्राप्य ऊर्जा सहित ऊर्जा के दो स्रोत हैं।
ऊर्जा संरक्षण में गुजरात राज्य का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके तहत महेसाणा जिले में सर्वप्रथम सौर ऊर्जा से संचालित मोढेरा को सूर्य ग्राम के रूप में पहचाना जाता है। इसके तहत संपूर्ण मोढेरा गांव सौर ऊर्जा से संचालित किया जा रहा है। गुजरात राज्य में 1600 किलोमीटर लंबा समुद्र किनारा है, इस कारण पवन ऊर्जा का उपयोग किया जाता है।
देश में पवन ऊर्जा के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य के लिए गुजरात प्रथम स्थान पर रहा है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर गुजरात के कच्छ जिले में राज्य का प्रथम सौर ऊर्जा संचालित दूध संयंत्र स्थापित किया गया है। इसके साथ ही कच्छ जिले के खावड़ा में देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क, ऊर्जा संरक्षण का श्रेष्ठ उदाहरण है।
गौरतलब है कि एक समय लोग प्राकृतिक ऊर्जा जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जल ऊर्जा का कम से कम उपयोग करके अपना जीवन यापन करते थे। पत्थरों को रगडक़र अग्नि ऊर्जा प्राप्त करने वाले लोग हिंसक जानवरों से सुरक्षा पाकर जीवित रहते थे। वर्तमान डिजिटल युग में तकनीक के साथ प्राकृतिक ऊर्जा को जोडक़र विभिन्न शोध के साथ लोग बेहतर जीवन जी रहे हैं, इसका एक आदर्श उदाहरण सोलर पैनल तकनीक है।
लोगों के लिए ऊर्जा एक अभिन्न अंग बन गई है, इसलिए देश के प्रत्येक क्षेत्र को ऊर्जा के मूल्य के बारे में जागरूक करने और इसका कुशल उपयोग करने के लिए वर्ष 2001 में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम बनाया गया था। जिसके तहत एक संवैधानिक निकाय के तौर पर ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी की स्थापना की गई।
Published on:
13 Dec 2022 11:02 pm
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