
डीजीपी का सभी पुलिस कमिश्नर, एसपी को निर्देश: १५ अप्रेल से पहले राज्य में ४२५०० बुजुर्गों का करें पंजीकरण
अहमदाबाद. शहर के पॉश क्षेत्र हेबतपुर की शांतिवन पैलेस सोसायटी में बुजुर्ग दंपत्ति अशोक एवं ज्योत्सना पटेल की गला रेतकर हत्या करने के बाद गुजरात पुलिस की नींद टूटती नजर आ रही है।
आरोपियों की गिरफ्तारी तो हो गई है, लेकिन बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर शहर पुलिस से लेकर गुजरात पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) आशीष भाटिया तक सतर्क नजर आ रहे हैं।
डीजीपी भाटिया ने इस संबंध में राज्य के सभी शहर पुलिस आयुक्तों (सीपी), जिला पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को निर्देश जारी किए हैं। जिसमें उन्होंने सभी सीपी, एसपी को कहा है कि १५ अप्रेल तक वे राज्य में ४२५०० बुजुर्गों का पंजीकरण करें। इसमें अकेले रहने वाले बुजुर्गों के साथ-साथ ऐसे बुजुर्ग दंपत्ति का भी पंजीकरण करने को कहा है, जिनकी संतान उनके साथ नहीं रहती है।
इसके लिए डीजीपी ने नमन-आदर के साथ अपनापन योजना लागू करने को कहा है। इस योजना को आशीष भाटिया जब खुद अहमदाबाद शहर पुलिस के आयुक्त थे तब उन्होंने अहमदाबाद शहर में लागू किया था।
पड़ोसी, घरेलू नौकरों की भी लें डिटेल
प्रत्येक थाने में उनके क्षेत्र में रहने वाले बुजुर्गों, बुजुर्ग दंपत्तियों का नाम, पता, संपर्क नंबर, आयु, सगे संबंधियों के नाम-नंबर, पड़ोसियों के नाम-नंबर भी लिए जाएंगे। इतना ही नहीं ऐसे लोगों के घर नियमित आने वाले लोगों, घरेलू नौकरों जिसमें रसोइया, साफ-सफाई करने वाले, उनके घर के किराएदार, दूधवाले, किराणा देने वाले, पेपर डालने वाले, सिक्योरिटी गार्ड के नाम-पते-संपर्क नंबर रखे जाएं।
हर दिन गश्त के दौरान करें मुलाकात, बनाएं रजिस्टर
डीजीपी ने निर्देश दिया है कि थानावार बुजुर्गों की सूची तैयार करने के बाद थाने का गश्ती वाहन (पेट्रोलिंग वान) उनके घर जाकर उनकी मुलाकात जरूर ले। नियमित तौर पर मुलाकात ली जाए और इसका एक रजिस्टर बनाया जाए। जिसमें उसका ब्यौरा दर्ज किया जाए। इस दौरान उनकी कोई लिखित या मौखिक समस्या हो तो उसका समाधान किया जाए।
दवा, लाइट-गैस बिल भरने में करें मदद
डीजीपी ने निर्देश दिया है कि नमन-आदर के साथ अपनापन योजना के तहत बुजुर्गों की मुलाकात के दौरान बुजुर्गों को यदि दवाई लाने, लाइट बिल या गैस बिल भरने में दिक्कत है तो पुलिस कर्मचारी उन्हें दवाई लाकर दें। उनका गैस और लाइट बिल भी भरने में भी मदद करें। उन्हें खुद के एवं जरूरी सहायता नंबर भी दें ताकि वे किसी समस्या में हो तों संपर्क कर सकें। उनके घर के खिड़की दरवाजे मजबूत हैं या नहीं यह भी जांचें। सीसीटीवी कैमरे भी जांचें। साइबर क्राइम से बचने के लिए ओटीपी वह किसी को फोन पर ना दें उसकी जानकारी उन्हें दें। एनजीओ की मदद भी लेने की कोशिश करें।
जानबूझकर अन्य बुजुर्गों को छोड़ें उन पर करें कार्रवाई
डीजीपी ने निर्देश में यह भी कहा है कि जो लोग बुजुर्गों को जानबूझ कर कहीं छोड़कर आते हैं ऐसे लोगों पर कार्रवाई करें। मामला दर्ज करें। माता-पिता एवं बुजुर्गों के भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम २००७ की धाराओं के तहत उनके परिजन उनकी देखरेख के लिए बाध्य हैं। जो बुजुर्ग भरण-पोषण के हकदार हों उनको इस संबंध में आवेदन करने में पुलिसकर्मी मदद करें।
Published on:
13 Mar 2021 11:14 pm
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