
Gujarat: कम कैलोरी के बिना भी जी सकती है मानव जाति
अहमदाबाद. 'चुंदड़ी वाले माताजी' के नाम से प्रसिद्ध प्रहलाद जानी पर दो बार परीक्षण करने वाले विश्व प्रसिद्ध न्यूरोलोजिस्ट डॉ सुधीर शाह के मुताबिक जानी पर किए गए शोध से यह भी पता चलता है कि खाने के बिना भी या कम खाने के बिना भी रहा जा सकता है। इसका मतलब कम कैलारी या कैलोरी के बिना भी मानव जाति जी सकती है। इसके लिए बायो ट्रांसफॉर्मेशन होना चाहिए। ये विश्व के विज्ञान के लिए बड़ी चुुनौती है। इसके तहत योग, ध्यान, प्राणायाम जैसी कई प्रक्रिया हो सकती है।
उन्होंने बताया कि जानी का पहली बार वर्ष 2003 में परीक्षण किया गया और फिर वर्ष 2010 में भी परीक्षण हुआ। जानी को लेकर पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम से मिलना हुआ। उनके निर्देशन की वजह से डीआरडीओ और दीपास की टीम जुड़ी। पहली बार दस दिन का परीक्षण किया गया और दूसरी बार 15 दिनों का परीक्षण किया गया। शाह ने रिसर्च टीम के अध्यक्ष के रूप में टीम ने जानी के शरीर की एक-एक जांच पूरी की।
जबरदस्त मनोबल, कभी बीमार नहीं पड़े जानी
डॉ शाह के मुताबिक 92 की उम्र में भी जानी काफी स्वस्थ दिख रहे थे। दो महीने पहले ही जानी से मिलने वाले डॉ शाह ने बताया कि जानी का मनोबल जबरदस्त था। वे कभी बीमार नहीं पड़़े। चार दिन कोई व्यक्ति यदि यूरिन नहीं करे तो किडनी फेल हो जा सकती है लेकिन इनके साथ कभी ऐसा नहीं हुआ।
Published on:
26 May 2020 11:32 pm
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