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गुजरात विधानसभा में महंगी बिजली खरीदी के मुद्दे पर विवाद

सरकार पर उद्योगपति को दो साल में 8 हजार करोड़ का लाभ पहुंचाने का आरोप, सरकार ने कहा, पारदर्शक प्रक्रिया अपनाई पिछले 20 वर्ष में बिजली की मांग तीन गुना बढ़ी: मंत्री देसाई, वर्ष 2002 में 7743 मेगावॉट के मुकाबले वर्ष 2023 में 24444 मेगावॉट यूनिट की खपत

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गुजरात विधानसभा में महंगी बिजली खरीदी के मुद्दे पर विवाद, कांग्रेस विधायकों का वॉकआउट

गुजरात विधानसभा में महंगी बिजली खरीदी के मुद्दे पर विवाद, कांग्रेस विधायकों का वॉकआउट

अहमदाबाद. गुजरात विधानसभा में मंगलवार को महंगी बिजली खरीदी के मुद्दे पर विवाद हुआ। कांग्रेस पार्टी के विधायकों ने सरकार पर चहेते उद्योगपति को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन व नारेबाजी की। इस मामले में राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि बिजली खरीदी की प्रक्रिया पारदर्शी है। कम कीमत पर बिजली खरीदने को सरकार ने प्राथमिकता दी जा रही है।

गुजरात विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता अमित चावड़ा ने संवाददाताओं को बताया कि गुजरात विधानसभा में सरकार की ओर से जो आंकड़े पेश किए गए हैं वह दर्शाते हैं कि गुजरात सरकार ने चहेते उद्योगपति को फायदा कराने का काम किया है।

डबल इंजन की सरकार ने डबल दाम पर खरीदी बिजली

चावड़ा ने कहा कि गुजरात सरकार ने वर्ष 2007 में अदाणी पावर के साथ 25 साल के लिए बिजली खरीदने को करार किए, जिसके तहत बिड-1 में प्रति यूनिट 2.89 रुपए और बिड-2 के तहत 2.35 रुपए प्रति यूनिट के तहत बिजली खरीदनी है। लेकिन सरकार ने जो आंकड़े सदन में दिए हैं , उसके तहत इस तय दर से दो से तीन गुना अधिक कीमत पर सरकार ने अदाणी से वर्ष 2022 और 2023 में बिजली खरीदी है। इन दो सालों में ही सरकार ने अतिरिक्त दर पर बिजली खरीदकर अदाणी पावर को 8265 करोड़ रुपए का लाभ पहुंचाया है। सरकार ने वर्ष 2022 में प्रति यूनिट 7.85 रुपए और वर्ष 2023 में 5.33 रुपए प्रति यूनिट पर अदाणी से बिजली खरीदी। 2022 में इस बढ़ी दर पर 6010 मिलियन यूनिट और वर्ष 2023 में बढ़ी दर पर 7425 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई। जिससे वर्ष 2022 में 4315 करोड़ रुपए ज्यादा चुकाए और 2023 में 3950 करोड़ रुपए ज्यादा चुकाए गए।

करार पर पुर्नविचार करे सरकार, रद्द कर नए सिरे से दे ठेका

चावड़ा ने कहा कि सरकार की दलील है कि कोयले के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ने के चलते सरकार को बढ़ी हुई दर पर बिजली खरीदनी पड़ी। लेकिन जब 25 साल के लिए करार हुआ है जो 2032 में पूरा होगा। ऐसे में सरकार को करार की समीक्षा करनी चाहिए। करार के तहत यदि कंपनी बिजली आपूर्ति ना करें तो करार रद्द किया जाए। नए सिरे से निविदा आमंत्रित की जाए और ठेका दिया जाए। चावड़ा ने कहा कि सरकार निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी बिजली कंपनियों के पावर प्लांट को संचालित नहीं कर रही है।

20 साल में बिजली की मांग तीन गुना बढ़ी: ऊर्जा मंत्री

ऊर्जा मंत्री कनु देसाई ने विधानसभा में महंगी बिजली की खरीदी के मुद्दे पर उठे सवालों के जवाब में कहा कि अदाणी पावर लिमिटेड से खरीदी जा रही बिजली में खरीदी की सभी प्रक्रियाएं पारदर्शक हैं। कम भाव से बिजली खरीदी को प्राथमिकता दी जा रही है। पहले किसानों को नए बिजली कनेक्शन के लिए 15-15 वर्ष तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब तीन से छह माह में ही कनेक्शन मंजूर कर दिए जाते हैं। राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली का उपयोग बढ़ा है। वर्ष 2003 में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 953 यूनिट थी जो वर्ष 2013 में बढ़कर 1800 यूनिट तक हो गई। जबकि 2023 में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 2402 यूनिट तक पहुंच गई। गुजरात में पिछले 20 वर्ष में बिजली की मांग में तीन गुना से भी अधिक की वृद्धि हुई है, जो दर्शाता है कि राज्य में प्रगति हो रही है। बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार को बिजली खरीदनी पड़ रही है। वर्ष 2002 में 7743 मेगावॉट के मुकाबले वर्ष 2023 में 24444 मेगावॉट यूनिट की मांग है।