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दुधारू पशुओं के उपचार में हर्बल दवा असरदार

Herbal medicine effective in the treatment of milch animals जीटीयू प्राध्यापकों की टीम ने तैयार किया फॉर्मुलेशन, मिला पेटेंट -मस्टाइटिस रोग से राहत दिलाएगा हर्बल ‘मस्टीजैल’ -इस रोग के चलते सूख जाता है ७० फीसदी दूध, भारत में मवेशियों में यह रोग है आम

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दुधारू पशुओं के उपचार में हर्बल दवा असरदार

दुधारू पशुओं के उपचार में हर्बल दवा असरदार

नगेन्द्र सिंह

Ahmedabad. दुधारू पशुओं के उपचार में हर्बल दवाईयां भी असरदार साबित हो रही हैं। गुजरात तकनीकी विश्वविद्यालय (जीटीयू) के प्राध्यापकों की टीम ने एक ऐसा हर्बल फॉर्मुलेशन तैयार किया है, जिसके जरिए बनाई गई हर्बल दवाई (जैल) दुधारू पशुओं को होने वाले मस्टाइटिस रोग से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित होगा। इस रोग के चलते दुधारू पशु ७० फीसदी तक दूध देना कम कर देते हैं। अभी इस रोग का उपचार करने के लिए ज्यादातर पशु चिकित्सक एन्टीबायोटिक दवाईयां-इंजेक्शन देते हैं, जो न सिर्फ पशुओं के लिए नुकसानदेह हैं बल्कि ऐसे पशुओं के दूध का सेवन करने वाले लोगों के लिए भी हानिकारक हैं। जीटीयू के प्राध्यापकों की टीम को इस हर्बल फॉर्मुलेशन के लिए पेटेंट भी मिला है।
इस फॉर्मुलेशन को जीटीयू के कुलपति प्रो.नवीन शेठ, जीटीयू अटल इन्क्यूबेशन सेंटर के प्रो.वैभव भट्ट के मार्गदर्शन में पीएचडी छात्र डॉ.मुकेश खेर ने तैयार किया है। डॉ.मुकेश खेर फिलहाल एलएम फार्मेसी कॉलेज अहमदाबाद में प्राध्यापक के तौर पर कार्यरत हैं।

हरीतकी (हरड़े) पेड़ से बनाया फॉर्मुलेशन
जीटीयू के कुलपति प्रो.नवीन शेठ ने बताया कि हरितकी (हरड़े-हर्र) नाम के पेड़ से हर्बल फॉर्मुलेशन यानि जैल बनाया है। इस पेड़ को अंग्रेजी में टर्मिनेलिया चेबुला कहते हैं। पेट की बीमारियों के लिए तैयार किए जाने वाले चूर्ण में भी इसका उपयोग होता है। शोध में इस पेड़ में ऐसी खूबी भी मिली है जो पशुओं कोहोने वाले मस्टाइटिस रोग पैदा करने वाले बहुविध प्रकार के बैक्टेरियाओं को भी खत्म करने में कारगर है। करीब छह से सात साल की लंबी रिसर्च के बाद इसे तैयार किया गया है।

दिखे अच्छे नतीजे, कैमिकल रहित
रिसर्च टीम में शामिल प्रो.वैभव भट्ट बताते हैं कि इस हर्बल फॉर्मुलेशन (जैल) की खूबी यह है कि इसे पूरी तरह से प्लांट से लिए गए एक्सट्रेक्ट से तैयार किया है। कोई कैमिकल उपयोग नहीं किया है। यह शुद्ध है, जिससे कोई साइडइफैक्ट भी नहीं होता है। चूहों पर उसके बाद गायों पर इसका उपयोग किया गया, जिसके काफी अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं। सुबह-शाम दूध निकालने के बाद गायों के थन पर इस जैल से मालिश करनी होती है।

क्या होता है मस्टाइटिस रोग
मस्टाइटिस रोग भारत में प्रचलित आम मवेशी रोग है। यह दुधारू पशुओं को होता है। इसका जल्दी पता भी नहीं चलता है, इसके होने पर दुधारू पशु का आंचल लाल हो जाता है। पशु ७० फीसदी तक दूध देना बंद कर देते हैं। जो पशु १५ लीटर दूध देता है वह फिर सिर्फ दो से तीन लीटर ही दूध देती है।

किफायती दाम पर उतारने का विचार
प्रो.नवीन शेठ ने बताया कि इस जैल को किफायती दाम पर पशुपालकों को उपलब्ध कराने का विचार है। इसके लिए और भी ज्यादा रिसर्च की मंजूरी मांगी है। ताकि ज्यादा से ज्यादा पशुपालकों और गोशालाओं में इसे दिया जा सके।

गिर, कांकरेज की तुलना में जर्सी गाय में ज्यादा रोग
प्रो.नवीन शेठ ने बताया कि इस रिसर्च में यह भी सामने आया कि गुजरात में पाई जाने वाली गिर गाय और कांकरेज गाय की तुलना में जर्सी गाय में यह मस्टाइटिस रोग ज्यादा होता है। रिसर्च में सामने आया कि देशी गिर गाय और कांकरेज गाय की रोगप्रतिरोधक क्षमता काफी बेहतर है।

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