
Improve the availability of water in 200 villages
अहमदाबाद।अंबुजा सीमेंट फाउंडेशन (एसीएफ) ने अपने रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में एक मार्गदर्शी पहल करते हुए पानी की मात्रा एवं गुणवत्ता से संबंधित संकट को दूर करने के उद्देश्य से गुजरात में २०० से अधिक गांवों को अपने जल संसाधन प्रबंधन कार्यक्रम किए हैं।
एसीएफ प्रमुख पर्ल तिवारी ने बताया कि पानी की किल्लत और लवणता की समस्या से प्रभावित गिर सोमनाथ जिले की सूतरापदा, कोडिनार, ऊना, वेरावल एवं तलाला तहसील के गांवों में पिछले कुछ वर्षों से बड़े पैमाने पर एवं अन्वेषणात्मक प्रयास किए गए हैं, जिसने इस क्षेत्र के पर्यावरण, भूजल संसाधन, लवणता न्यूनीकरण के साथ-साथ कृषि व संबद्ध आजीवीका गतिविधियों पर प्रकाश डाला है। इस प्रयासों ने ना केवल कृषि, पशुपालन, पेयजल आवश्यकताओं व घरेलू गतिविधियों के लिए पानी की उपलब्धता को बेहतर बनाया।
इसका लाभ ग्रामीणों व किसानों को मिला है। अकेले कोडिनार में एसीएफ ने ८३ गांवों में १५ हजार ६०० हेक्टेयर कृषि भूमि में लवण की प्रवृत्ति को समाप्त करने में सफलता पाई। जल प्रबंधन आंदोलन के तहत आगामी २०२० तक ३०० गांवों को शामिल करने का लक्ष्य है।
पीने के पानी की समस्या दूर करने की मांग
तारापुर तहसील के इंद्रणज व गलियाणा गांव के दलितों ने पीने के पानी,जर्जरित रास्तों तथा श्मशान भूमि के लिए ने कलक्टर को ज्ञापन देकर इन समस्याओं के समाधान की मांग की। गलियाणा गांव के वणकरवास में रहने वाली नीरूबेन वाघेला, भानुबेन, गुणीबेन, मीनाबेन व इंद्रणज गांव की मोधीबेन मकवाणा, नानीबेन मकवाणा, हंसाबेन व अन्य महिलाओं ने कलक्टर धवल कुमार पटेल को दो अलग-अलग ज्ञापन दिए। इंद्रणज गांव की हंसाबेन मकवाणा ने कहा कि इंद्रणज गांव के वणकरवास में देश की आजादी के 70 साल बाद भी अभी तक पीने के पानी की सुविधा सुनिश्चित नहीं हो पाई है। पानी के लिए महिलाओं को गांव से पांच सौ मीटर दूर हाईवे के समीप कुएं पर जाना पड़ता है।
अनुसूचित जाति की महिलाओं को दिन में मजदूरी के लिए जाना पड़ता है। नहाने व कपड़ा धोने के पानी के लिए रात में महिलाओं को मज*****ी में इतनी दूर जाना पड़ता है। इससे उनकी इज्जत को हमेशा खतरा रहता है। इसके अलावा सरकारी योजनाओं का लाभ भी इस गांव को नहीं मिल रहा है।
गलियाणा गांव की भानुबेन ने बताया कि गांव की महिला सरपंच नीरूबेन हैं। लेकिन उनका कामकाज उनके पति दीलुभाई सिणोल करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वह वणकरवास में पानी की पाइप लाइन डालने के लिए प्रत्येक घर से एक हजार रुपए की मांग करते हैं। श्मशान भूमि पर जाने वाले रास्ते पर अन्य जाति के लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। वणकरवास में पीने के पानी वाला कुआ जर्जरित हो गया है और रास्ते भी टूटे हुए हैं।
Published on:
08 Sept 2017 09:54 pm

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