
Industrial policy: 'गुजरात में बनेेंगे प्राइवेट इंडस्ट्रीयल पार्क'
गांधीनगर. गुजरात में (Gujarat) प्राइवेट इंडस्ट्रीयल पार्क (private industrial park) बनाने के लिए निजी डवलपर्स (private developers) को फिक्सड कैपिटल इन्वेस्टमेन्ट (capital investment) का 25 फीसदी अर्थात् 30 करोड़ रुपए तक प्रोत्साहन दिया जाएगा। यदि वनबंधु तालुका में इडंस्ट्रीयल पार्क स्थापित किए जाते हैं तो 50 फीसदी अर्थात् 30 करोड़ रुपए तक सहयोग दिया जाएगा। इसके जरिए औद्योगिक विकास और गति मिलेगी। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी (CM vijay rupani) ने शुक्रवार को अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के चार वर्ष पूर्ण होने के मौके पर गांधीनगर में नई औद्योगिक नीति की घोषणा करते यह बात कही।
उन्होंने कहा कि हालांकि 31 दिसम्बर को पिछली औद्योगिक नीति की अवधि पूर्ण हो चुकी है, लेकिन फिलहाल उस नीति को भी इस वर्ष दिसम्बर तक जारी रखा जाएगी। इसके जरिए राज्य के सर्वांगी विकास को गति मिली है। भारत सरकार के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो वर्ष 2019 में गुजरात 49बिलियन यूएस डॉलर के इंडस्ट्रीयल एन्टरप्रेन्योरशिप मेमोरेण्डम (आईईएम) हुआ, जिसमें देश के कुल आईईएम का 51 फीसदी हिस्सा गुजरात का है।
उन्होंने कहा कि क्लस्टर्स को बढ़ावा देने के लिए सड़कों का निर्माण, गोदामों की सुविधा, फायर स्टेशन समेत सुविधाओं वाले औद्योगिक ढांचे बनाया जाएगा। इसके लिए परियोजना खर्च का 80 फीसदी अर्थात् 25 करोड़ रुपए तक वित्तीय सहायता दी जाएगी।
सिंगल विंडो सिस्टम (single window system) से मिलेगी मंजूरी
उद्योग लगाने वालों को एक ही जगह पर सभी मंजूरी मिलेंगी। इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनेगा सरकार से संबंधित मुद्दों या फिर मंजूरी के लिए इंडस्ट्रीयल एक्सटेंशन ब्यूरो (इंडेक्टबी) की ओर से डेडिकेटेड रिलेशन शिप मैनेजर नियुक्त किया जाएगा।
सरकारी जमीन लीज पर दी जाएगी
रुपाणी ने कहा कि कोई भी उद्योग लगाना होता है तो सबसे ज्यादा महंगी जमीन होती है। ऐसे में नए उद्योग लगाने के लिए सरकारी जमीन 50 वर्ष के लिए लीज पर दी जाएगी। इसके एवज औद्योगिक इकाइयों को जमीन के बाजार मूल्य पर हर वर्ष छह फीसदी लीज किराया भुगतान करना होगा। इसके अलावा राज्य सरकार उद्योग लगाने के लिए बैंक ऋण भी मुहैया कराने में मदद करेगी। हालांकि लीज की समयावधि को समय-समय पर नियमानुसार बढ़ाई भी जा सकेगी। वहीं नए उद्योगों को पांच वर्ष तक इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी में राहत दी जाएगी।
एमएसएमई को मिलेगी गति
उन्होंने कहा कि नई नीति में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया गया है। राज्य सरकार तकनीकी विकसित करने, उत्पादों की अंतरराष्ट्रीयस्तर पर मार्केटिंग करने में सहयोग करेगी। एमएसएमई को बैंक ऋण में 25 फीसदी या फिर 35 लाख रुपए तक सब्सिडी देगी। सात वर्ष तक हर वर्ष सत्र ऋण के ब्याजदर पर 7 फीसदी अथवा अधिकतम 35 लाख रुपए तक ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। वहीं सेवा एमएसएमई जैसे कि वित्तीय सेवाएं, स्वास्थ्य सेवाएं, सूचना-प्रसार सेवाएं, निर्माण संबंधित इंजीनियरिंग सेवाएं, पर्यावरण सेवाओं को सात फीसदी तक ब्याज में सब्सिडी दी जाएगी।
विदेशी तकनीक करेगी अधिग्रहण
एमएसएमई की ओर से विदेशी तकनीकी खरीदने के लिए राज्य सरकार पहली बार 65 फीसदी तक वित्तीय मदद करेगी, जो अधिकतम 50 लाख तक होगी। इसके चलते एमएसएमई के उत्पादन वैश्विक स्पद्र्धा में टिके रह सकेंगे।
Published on:
07 Aug 2020 10:57 pm
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