गांधीनगर. राज्य सरकार ने बुधवार को ‘गुजरात पुनर्नवीनीकरण ऊर्जा नीति-2023’ की घोषणा की। यह नीति नवीकरणीय ऊर्जा के मुख्य स्रोतों को शामिल करने वाली नीति है। इस नीति से 5 लाख करोड़ रुपए के निवेश होने की संभावना है। इस नई नीति के तहत 2030 तक कुल बिजली उत्पादन का 50 फीसदी हिस्सा पुनर्नवीनीकरण ऊर्जा से प्राप्त करने का उद्देश्य है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की ओर से जारी यह नीति पवन, सौर और हाइब्रिड तकनीक पर आधारित पुनर्नवीनीकरण उत्पादन प्रोजेक्ट की स्थापना को बढ़ावा देने वाली विशिष्ट नीति है। इस नीति के तहत जमीन पर लगा सोलर पैनल, रूफटॉप (छत पर लगा) सोलर पैनल, फ्लोटिंग (पानी पर तैरता) सोलर पैनल, कैनाल टॉप (नहर के ऊपर लगाया) सोलर पैनल और पवन , पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं को शामिल कर लिया जाएगा। इस नीति की परिचालन अवधि नई नीति के घोषित होने तक या 2028 तक रखी गई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरित ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को लगातार बढ़ाते हुए भारत में वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य के साथ अल्पकालिक लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं। इनमें वर्ष 2030 तक भारत की पुनर्नवीनीकरण ऊर्जा की क्षमता को 500 गीगावाट तक बढ़ाना है। साथ ही देश की कुल ऊर्जा जरूरतों का 50 फीसदी पुननर्वीनीकरण ऊर्जा से प्राप्त करने का लक्ष्य शामिल है। इस नई नीति के तहत 2030 तक कुल बिजली उत्पादन का 50 फीसदी हिस्सा पुनर्नवीनीकरण ऊर्जा से प्राप्त करने के उद्देश्य के साथ विभिन्न सुविधाएं प्रदान करने का प्रावधान किया है।
4 लाख एकड़ जमीन का होगा उपयोग
ऊर्जा मंत्री कनू देसाई की उपस्थिति में जारी इस नीति के तहत आने वाली परियोजनाओं में अनुमानित 4 लाख एकड़ जमीन के उपयोग की संभावना है। इस नीति के तहत प्राप्य लाभ प्रोजेक्ट कमीशनिंग यानी परियोजना शुरू होने की तारीख से 25 वर्ष की अवधि या पुनर्नवीनीकरण प्रोजेक्ट की लाइफ टाइम अवधि, में से जो पहले हो, तब लागू होंगे। इसमें संभावित पुनर्नवीनीकरण ऊर्जा की क्षमता का अधिकतम उपयोग किया जाएगा।
गुजरात ऊर्जा विकास एजेंसी होगी नोडल एजेंसी
गुजरात ऊर्जा विकास एजेंसी (जीईडीए) नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी। इसमें परियोजना के पंजीकरण, सत्यापन, स्थापित करने, प्रमाण पत्र और मासिक प्रगति रिपोर्ट जैसे कार्य शामिल हैं। नीति के कार्यान्वयन, समन्वय और देखरेख एजेंसी के रूप में गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल) कार्य करेगा।
नीति जारी करने के अवसर पर ऊर्जा मंत्री कनू देसाई, मुख्य सचिव राज कुमार, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव के. कैलाशनाथन, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार दास, अपर मुख्य सचिव पंकज जोशी, जे.पी. गुप्ता तथा प्रधान सचिव ममता वर्मा एवं संजीव कुमार सहित वरिष्ठ सचिवगण एवं ऊर्जा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।