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आजादी के बाद जैन संत का पाकिस्तान की धरती पर प्रवेश

आचार्य धर्मधुरंधरसूरि ने अटारी-वाघा सीमा से किया प्रवेश

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आजादी के बाद जैन संत का पाकिस्तान की धरती पर प्रवेश

आजादी के बाद जैन संत का पाकिस्तान की धरती पर प्रवेश

वडोदरा. भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद पहली बार किसी जैन संत ने पाकिस्तान की धरती पर प्रवेश किया है। वल्लभसूरी समाज के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य धर्मधुरंधरसूरि ने रविवार को आज अटारी-वाघा सीमा से पाकिस्तान में प्रवेश किया। वे सोमवार को लाहौर के गुजरावाला में सरकारी संग्रहालय में गुरुदेव विजयानंदसूरि (आत्माराम महाराज) की चरण पादुका के दर्शन करेंगे।
आचार्य धर्मधुरंधरसूरि ने इस अवसर पर कहा कि आप विश्वास कर सकते हैं, शरीर मेरा होगा, वाणी मेरी होगी, हृदय मेरा होगा, लेकिन नहीं, यह शरीर, हृदय और वाणी आपकी है। ऐसा मानकर वे गुरुदेव विजयानंदसूरि के दर्शन करेंगे। वडोदरा के एक जैन श्रावक दीपक शाह के अनुसार आचार्य धर्मधुरंधरसूरि एक महीने के लिए पाकिस्तान घूमने गए हैं। वे सोमवार को लाहौर विश्वविद्यालय पहुंचेंगे और वहां से पाकिस्तान दौरे के लिए रवाना होंगे। आचार्य धर्मधुरंधरसूरि 4 साल पहले चातुर्मास करने के लिए वडोदरा के मांजलपुर जैन संघ आए थे। कोरोना काल में वे चातुर्मास करने पावागढ़ गए थे।

भारत-पाक विभाजन के समय गुजरावाला में थे जैन संत

उन्होंने कहा कि 1947 में जब भारत-पाकिस्तान का विभाजन हुआ था, वडोदरा के निवासी आचार्य वल्लभसूरि गुजरावाला में चातुर्मास कर रहे थे। उस समय देश के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने अनुरोध किया कि तबीयत अभी ठीक नहीं है, वे अपने साधु-साध्वी के साथ यहां हिंदुस्तान आ जाएं। उस समय वल्लभसूरि ने कहा कि यहां और भी जैन और हिंदू हैं, उनका क्या होगा। यहां से ले जाना चाहते हैं, तो वे अकेला नहीं आएंगे, सभी जैन और हिंदू भी आएंगे, उनकी व्यवस्था कर दीजिए, तभी वे आएंगे। उस समय सरदार वल्लभभाई पटेल ने सेना भेजी और आचार्य, उनके शिष्य और श्राविकाओं को वापस भारत पहुंचाया। आचार्य वल्लभसूरि का जन्म वडोदरा की जानी स्ट्रीट में हुआ था।

18 श्रावक भी साथ में

उन्होंने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी कोई जैन संत पाकिस्तान की धरती पर नहीं पहुंचा, लेकिन भारत सरकार और पाकिस्तान सरकार ने वल्लभसूरी समाज के गच्छाधिपति आचार्य धर्मधुरंदरसूरि, मुनि ऋषभचंद्र विजय, धर्मकीर्तिविजय, महाभद्रविजय और उनके साथियों 18 श्रावकों को पाकिस्तान जाने की अनुमति दी है। वे पैदल ही पाकिस्तान के लाहौर पहुंचेंगे। वहां आचार्य विजयानंदसूरि की चरण पादुका के दर्शन कर गुजरावाला की ओर बढ़ेंगे।