गांधीनगर. केन्द्रीय शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ज्ञान ही शक्ति है, यह पुरानी कहावत है। यह अतीत में भी उतना ही प्रासंगिक था जितना आज है। आधुनिक विकास ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार जैसे तीन अक्षरों पर टिका है। सिंगापुर एक ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था है। इसने पिछले 30-40 वर्षों में ज्ञान और शिक्षा में उत्कृष्टता से खुद को बदल लिया है।
वे केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय, ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) और सिंगापुर की नान्यांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एनटीयू) की ओर से रविवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर (आईआईटी-गांधीनगर) में आयोजित सिंगापुर- इंडिया हैकाथॉन के तीसरे संस्करण के फाइनल समारोह को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि सिंगापुर-भारत हैकथॉन जैसी पहल दोनों देशों के बीच ज्ञान हस्तांतरण में मदद करेगी। इस दौरान हैकाथॉन के विजेताओं को सम्मानित किया।
सिंगापुर के उप प्रधान मंत्री और वित्त मंत्री लॉरेंस वोंग ने कहा कि यह हैकथॉन अद्वितीय और अनमोल है। इसे दोनों देशों के नेताओं का समर्थन मिला है और इसकी कल्पना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण से की गई है। वे कोविड-19 महामारी के बाद पहली बार समापन कार्यक्रम के लिए गांधीनगर आए थे।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिंगापुर के उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री लोरेंस वोंग से वित्तीय धोखाधड़ी की जांच, वित्तीय सर्व समावेशकता और क्रेडिट ओफरिंग, समुद्री सतह में वृद्धि और कोस्टल फ्लडिंग, फूड रिसाइक्लिंग का ऑप्टीमाइज करना, कार्बन फुटप्रिन्ट का निरीक्षण करना और सिंगापुर इंडिया ट्रेड कनेक्टीविटी को प्रोत्साहन देने के लिए सहयोग और समाधान के लिए भारत और सिंगापुर के स्टार्टअप और विद्यार्थियों को एकमंच पर लाने का अनुरोध किया था। इसके मद्देनजर ही सिंगापुर-इंडिया हैकाथॉन की परिकल्पना की गई थी। इस हैकाथॉन के जरिए एनटीयू सिंगापुर और आईआईटी- गांधीनगर जैसी शैक्षणिक संस्थाओं और दोनों ही देशों के कॉर्पोरेट्स और सार्वजनिक क्षेत्र को एकमंच पर लाया गया ताकि मौसम में बदलाव, वित्तीय सर्वसमावेशी स्टार्टअप के निर्माण के लिए उद्यमियों को मार्गदर्शन दिया जा सके। इस मौके पर आईआईटी-गांधीनगर के निदेशक प्रो. रजत मूना समेत कई गणमान्य मौजूद रहे।