
गिरीश पटेल लाए थे गुजरात में पीआईएल की अवधारणा
अहमदाबाद. जाने-माने वकील, मानवाधिकार कार्यकर्ता और गरीबों-वंचितों-शोषितों के मसीहा गिरीश पटेल का शनिवार को निधन हो गया। पटेल ही गुजरात में जनहित याचिका (पीआईएल) की अवधारणा लेकर आए थे। उन्होंने गुजरात उच्च न्यायालय में 100 से ज्यादा पीआईएल दायर की थी।
पटेल के मातहत काम करने वाले वकील आनंद याज्ञिक ने बताया कि पटेल शोध करने के बाद करते थे पीआईएल करते थे। याज्ञिक के मुताबिक पटेल इन्वेस्टिगेंटिंग लिटिगेशन में विश्वास रखते थे। वे पीआईएल दायर करने से पहले अपनी टीम के लोगों को संबंधित विषय पर शोध करने, संबंधित व्यक्ति से मिलने, सरकारी अधिकारियों को कहा करते थे। गुजरात उच्च न्यायालय के 30 से ज्यादा जज व सुप्रीम कोर्ट के करीब 7 जज उनके विद्यार्थी रहे। अंतिम बार वे सफल रूप से लोकायुक्त मामले में लड़े जिसमें मोदी सरकार ने तत्कालीन राज्यपाल कमला के लोकायुक्त आर ए मेहता को राज्य का लोकायुक्त नियुक्त किए जाने को गुजरात उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
5 दिसम्बर 1932 को अहमदाबाद के खाडिया में जन्मे पटेल ताउम्र सादा जीवन उच्च विचार को मानने वाले माक्र्सवादी गांधीवादी थे। वे खुद को कम्युनिस्ट मानते थे। उनका कोई शत्रु नहीं था।
आजादी की लड़ाई के साथ-साथ महागुजरात व गुजरात के नवनिर्माण आंदोलन में सक्रिय भूमिका वाले पटेल ने अहमदाबाद में पढ़ाई की। चरोत्तर और सरदार की धरती नडियाद मूल के पटेल विलक्षण प्रतिभा के धनी थे।
सिर्फ 13 वर्ष की अवस्था में एक आंख की रोशनी खोने वाले ने अहमदाबाद के एल.ए. शाह लॉ कॉलेज से एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई की। दोनों में सभी विषयों में गोल्ड मेडल पाने के कारण उन्हें जस्टिस काटजू स्कॉलरशिप प्रदान की गई। इसके आधार पर उन्होंने वर्ष 1952 में अमरीका के हॉर्वर्ड लॉ स्कूल में 2 वर्ष तक पढ़ाई की। इसके बाद वे अगले दो वर्षों के लिए द हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पढ़ाने पहुंचे। फिर वे अहमदाबाद वापस आ गए जहां पर वे आईएम नानावटी लॉ कॉलेज में वर्ष 1955-56 से लेकर वर्ष 1974-75 के दौरान 20 वर्षों तक प्राचार्य रहे।
नवनिर्माण आंदोलन में निभाई सक्रिय भूमिका
इस पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने नवनिर्माण आंदोलन की लड़ाई लड़ी। देश में पहली बार विद्यार्थियों ने किसी चुनी हुई सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। इसके बाद आपातकाल में भी उनकी लड़ाई जारी रही। वर्ष 1977 में उन्होंने लोक अधिकार मंच का गठन किया जिसके बैनर तले उन्होंने गुजरात उच्च न्याायालय में जनहित याचिकाएं दायर कीं। आश्चर्य की बात है कि उन्होंने वकालत की प्रैक्टिस 43 वर्ष में आरंभ की। लेबर लॉ, इंडस्ट्रियल लॉ के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे संविधान में महारत हासिल थी। याज्ञिक तो उन्हें किंग ऑफ कंस्टीट्यूशन बताते हैं।
पटेल के मातहत काम करने वाले वकील मनोज श्रीमाली बताते हैं कि वे गरीबों के बीच जाकर उनकी परेशानियों को समझने का पूरा प्रयास करते थे।
Published on:
11 Oct 2018 04:44 pm
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