
Gujarat : दुनिया से जाते-जाते भी कई लोगों को जीवन दे गए अशोक वोरा,Gujarat : दुनिया से जाते-जाते भी कई लोगों को जीवन दे गए अशोक वोरा,Gujarat : दुनिया से जाते-जाते भी कई लोगों को जीवन दे गए अशोक वोरा
राजकोट. जीवनकाल में जरूरतमंद लोगों की सेवा में जुटे रहे अशोक वोरा (60) जब दुनिया से विदा हुए तो भी अनेक लोगों को जीवन दे गए। दरअसल ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद अशोक के परिजनों ने अंगदान की सहमति दी थी, जिससे दो किडनी, लीवर, त्वचा और आंखों का दान किया गया। राजकोट में पिछले 16 वर्ष में यह 100वां अंगदान बताया जा रहा है।
राजकोट निवासी अशोक वोरा का गत 17 अक्टूबर को मोतिया का ऑपरेशन किया गया था। यह ऑपरेशन सफल हो गया था, लेकिन ऑपरेशन के दो-तीन घंटे बाद अशोक को चक्कर आए और वे बेहोश हो गए थे। पुत्र व डॉ. प्रीतेश वोरा (डेंटल सर्जन) ने पिता अशोक को शहर के मेडिकेयर हॉस्पिटल पहुंचाया। जहां अशोक के ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि होने पर उन्हें शहर के स्टर्लिंग अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां उनका न्यूरो संबंधित ऑपरेशन किया गया। चिकित्सकों का कहना है कि स्ट्रोक से ब्रेन को ज्यादा नुकसान होने के कारण वे होश में नहीं आए। अन्तत: उचित जांच की गईं, जिसमें अशोक को ब्रेन डेड घोषित किया गया।
परिजनों ने जताई अंगदान की इच्छा
इस स्थिति में ब्रेनडेड अशोक के परिजनों ने अंगदान की इच्छा जताई थी। इसके बाद उन्हंोंने राजकोट की ऑर्गन डोनेशन फाउंडेशन संस्था के डॉ. संकल्प वणजारा से संपर्क किया। अशोक वोरा के लिवर, दो किडनी, दो आंख और त्वचा का दान किया गया। गुरुवार तडक़े दोनों किडनी और लिवर को ट्रान्सप्लान्ट के लिए अहमदाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजिस एंड रिसर्च सेंटर (आईकेडीआरसी) भेजा गया। जहां मरीजों को इन तीनों ही अंगों का प्रत्यारोपण किया। दोनों आंखों को राजकोट के आई बैंक में रखा गया और त्वचा को स्किन बैंक में पहुंचाया गया।
इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस अंगदान की इस प्रक्रिया में राजकोट की ऑर्गेन डोनेशन फाउंडेशन संस्था के डॉक्टर दिव्येश विरोजा, डॉ. संकल्प वणजारा, मितलभाई खेताणी, भावनग मंडली व नितिन घाटिलिया की अहम भूमिका रही। राजकोट में प्रथम अंगदान 2006 में हुआ था जिसके बाद यह 100 वां अंगदान बताया गया है।
Published on:
20 Oct 2022 09:30 pm
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