
मेहसाणा : तरभ गांव में कल पीएम मोदी की उपस्थिति में होगी महाशिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा
संकेत सिडाना
मेहसाणा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में 22 फरवरी को मेहसाणा जिले की विसनगर तहसील के तरभ गांव में श्री वालीनाथ महादेव के महाशिवलिंग व स्वर्ण शिखर का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित होगा। इन दिनों इस मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव मनाया जा रहा है। महोत्सव के आखिरी दिन 22 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल व कैबिनेट मंत्री ऋषिकेश पटेल भी उपस्थित रहेंगे।
वालीनाथ शिवधाम तीर्थ भूमि विसनगर तहसील और मेहसाणा जिले के लोगों की आस्था का प्रतीक है। लगभग 900 वर्ष प्राचीन वालीनाथ अखाड़े के परिसर में 500 किलोग्राम वजन के शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा होगी।
मालधारी समाज की गुरु गादी
हर वर्ग के श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। यहां मालधारी समाज की गुरु गादी मानी जाती है। समाज के लोग गुरु सेवक के रूप में यहां सेवा कर रहे हैं। विरमरिरि बापू के विशेष सेवक मालधारी समाज के लोग हैं।
धाम में समाज की विशेष आस्था
वालीनाथ धाम में मालधारी समाज की ओर से गुरु की पूजा में विशेष आस्था रखी जाती है। बलदेवगिरि ने पुस्तक परब की शुरुआत की और रबारी समाज में शिक्षा की अलख जगाई। इस कारण वालीनाथ धाम में मालधारी समाज की विशेष आस्था है।
ऐसा है मंदिरयहां श्री वालीनाथाय नम: महादेव मंदिर का निर्माण हो रहा है। इस अनोखे शिवालय मेंं तीन मुख्य शिखर हैं। मुख्य गर्भगृह में भगवान श्री वालीनाथ महादेव, दाईं ओर गुरु श्री दत्तात्रेय भगवान तथा बाईं ओर कुलदेवी पराम्बा भगवती हिंगलाज माताजी की प्रतिमा है।
68 खंभों पर सजा यह शिवालय 101 फीट ऊंचा
नागर शैली में नवनिर्मित इस शिवालय का निर्माण भारतवर्ष के प्रसिद्ध वास्तुकार सोमपुरा परिवार और राजस्थान व ओडिशा के मूर्तिकारों की ओर से बारीकी से की गई नक्काशी बेजोड़ है। वर्तमान युग में राजस्थान के भरतपुर जिले के बंसीपहाड़पुर के पत्थर एवं नागर शैली में नवनिर्मित शिवधाम श्री वालीनाथ महादेव मंदिर शिल्पकला का उत्तम उदाहरण बनी रहेगी। लगभग 10 वर्षों की कड़ी मेहनत से शिवालय का निर्माण किया गया है। 68 खंभों पर सजा यह शिवालय 101 फीट ऊंचा है। इसकी लंबाई 265 फीट और चौड़ाई 165 फीट है और इसमें 1,45,000 घन फीट में पत्थर का इस्तेमाल हुआ है।
उत्तर गुजरात का पहला बड़ा शिवधाम
यह ऐतिहासिक नूतन शिवालय प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ के बाद उत्तर गुजरात का पहला बड़ा शिवधाम है। पत्थर से बने इस अद्भुत शिवालय की भव्यता और दिव्यता देखने लायक है।
विरमगिरी बापू का हुआ था आगमन
बताया जाता है कि इस शिव भूमि पर रबारी जाति के विरमगिरि बापू का आगमन हुआ था। भक्त तरभोवन रबारी के आग्रह के बाद विरमगिरि बापू वालीनाथ धाम पहुंचे थे। उन्हीं भक्त के नाम पर गांव का नाम तरभ पड़ा। यहां पहुंचे विरमगिरि बापू को जमीन में दबी भगवान वालीनाथ की मूर्ति व धूणी के दर्शन हुए थे। उसके बाद जमीन में दबी भगवान वालीनाथ की मूर्ति को बाहर निकालकर प्रतिष्ठा की गई और रायण के वृक्ष के नीचे अखंड धूप जलाई गई।
इसलिए नाम पड़ा वालीनाथ
दंतकथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के साथ रासलीला कर रहे थे, उस समय गोपियों के रूप में भगवान शिव भी वहां पहुंचकर रास करने लगे। भगवान श्रीकृष्ण ने उनके नाक या कानों में पहनी वाली (बाली) के स्वरूप के कारण पहचान लिया गया था, इसलिए भगवान शिव को वालीनाथ के नाम से जाना जाता है।
Published on:
20 Feb 2024 10:19 pm
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