
16,000 से अधिक समुद्री जीव सृष्टि को नरारा टापू पर किया स्थानांतरित
भावना सोनी
जामनगर. शहर के समीप नरारा टापू पर एक ऐसी घटना घटी है जो देश में कभी नहीं हुई। देश में पहली बार पाइपलाइन के लिए 16,000 से अधिक समुद्री जीव सृष्टि को नरारा टापू पर स्थानांतरित किया गया।ऑयल कंपनी की 40 साल पुरानी पाइपलाइन को बदलने के लिए मरीन नेशनल पार्क की समुद्री जीव सृष्टि और कोरल को खतरा था। इसलिए वन विभाग और भू-विज्ञान विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से देशभर में पहली बार एक अभियान चलाया। इस दौरान 16,000 से अधिक समुद्री जीव सृष्टि और कोरल को पांच किलोमीटर दूर नरारा टापू पर स्थानांतरित किया।
समुद्री जीव, कोरल का घर नरारा टापूजामनगर के समीप नरारा टापू को समुद्री राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया है। यह विभिन्न प्रकार की समुद्री जीव सृष्टि और कोरल का घर है। हर साल लाखों पर्यटक इस टापू पर आते हैं। समुद्री राष्ट्रीय उद्यान घोषित होने से पहले एक ऑयल कंपनी की 40 साल पुरानी पाइपलाइन इस क्षेत्र से होकर गुजर रही है।
अब इस पाइपलाइन को समय के साथ बदला जाना था लेकिन मरीन नेशनल पार्क के कानून के कारण यह संभव नहीं था। वन विभाग और भू-विज्ञान विभाग की एक टीम ने देश भर में पहली बार अभियान चलाया। इस दौरान समुद्री जीव सृष्टि और कोरल को उनके मूल स्थान से 5 किलोमीटर दूर नरारा टापू पर स्थानांतरित किया गया।इस कार्य में दो साल और नौ महीने लगे लेकिन वन विभाग और भू-विज्ञान विभाग की टीम ने यह उपलब्धि हासिल की है। क्योंकि समुद्री जीव सृष्टि और कोरल को स्थानान्तरित करने में उसे कोई नुकसान नहीं हुआ और कोरल भी जीवित रहे। स्थानांतरण में काफी सावधानी बरती गई और अभी भी उनकी देखभाल की जा रही है। इस उपलब्धि से भारत के अन्य स्थानों को भी लाभ मिल सकता है।
बहुत चुनौतीपूर्ण था काम
मरीन नरारा टापू के आरएफओ परबत करमुर ने कहा कि नरारा टापू पर लगभग 16,000 समुद्री जीव सृष्टि को स्थानांतरित किया गया, जो बहुत चुनौतीपूर्ण था। भू-विज्ञान विभाग की टीम ने महीने में 20 दिन समुद्री जीव सृष्टि व कोरल की जांच की और पाया कि स्थानांतरित किए गए कोरल में से 90 फीसदी से से अधिक जीवित थे और बढ़ रहे थे।
इंटर टाइडल और सब टाइडल क्षेत्रों में किया कार्य
समुद्री जीव सृष्टि और कोरल को स्थान्तरित करने का कार्य इंटर यानी ऊपरी क्षेत्र और सब टाइडल यानी आंतरिक क्षेत्र पर की गई है। इसके लिए दो किलोमीटर की नर्सरी बनाई गई है। सब टाइडल क्षेत्र में कम ज्वार पर छह से सात मीटर और इंटर टाइडल में एक मीटर पर काम किया गया है, जिसके लिए नौ स्थलों का निर्माण किया गया है।
Published on:
20 Feb 2024 10:20 pm
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