
Working women hostel: केरल में सर्वाधिक वर्किंग वुमैन होस्टल, इन पांच राज्यों में ऐसी कोई सुविधा नहीं
Most working women hostel in Kerala, no such facility in 5 states
पढ़ाई, नौकरी या नौकरी की ट्रेनिंग के लिए किसी रिसर्च के लिए आम तौर पर अपने घर व परिवार से अकेली युवती व महिलाओं को दूसरे शहर जाना पड़ता है। ऐसी कामकाजी महिलाओं व युवतियों की सुरक्षा को देखते हुए कामकाजी महिला छात्रावास (वर्किंग वुमैन हॉस्टल) शुरु की गई है। इनमें बच्चों के लिए डे केयर की भी सुविधा होती है। देश भर में फिलहाल डे केयर सुविधाओं के साथ इनकी संख्या 494 है। दक्षिण के राज्यों में अपेक्षाकृत ज्यादा अच्छी स्थिति दिखती है हालांकि कई राज्यों में होस्टल ही नहीं हैं। इनका नाम अब सखी निवास कर दिया गया है।
राज्यसभा मेें पिछले दिनों केन्द्रीय महिला व बाल विकास मंत्रालय की ओर से पेश की गई जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा वर्किंग वुमैन हॉस्टल केरल है जहां इसकी संख्या 129 है। दूसरी संख्या महाराष्ट्र की है जहां पर यह संख्या 77 है। दक्षिण के अन्य राज्यों में देखें तो कर्नाटक में 62, तमिलनाडु में 54, आंध्र प्रदेश में 12 व पुदुचेरी में 3 है। दिल्ली में यह संख्या 17 और गुजरात में 15 है।
हॉस्टल में रहने को लेकर कई नियम व शर्तें भी हैं जिनमें मेट्रो सिटी में काम करने वाली महिलाओं का मासिक वेतन 50 हजार और सेमी अर्बन शहरों में काम करने वाली महिलाओं का वेतन 30 हजार से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
इन पांच राज्यों में ऐसी कोई सुविधा नहीं
उत्तरांखड, त्रिपुरा, बिहार, गोवा और जम्मू-कश्मीर में इस तरह के हॉस्टल की सुविधा नहीं है। उत्तर पूर्वी राज्यों में सबसे ज्यादा मणिपुर में 15 और नागालैण्ड में 12 हैं। अरुणाचल प्रदेश में 5, मेघालय व मिजोरम में ३-३, सिक्किम में एक है। ओडिशा में 12, यूपी में 8, हिमाचल व छ्त्तीसगढ़ में 6-6 ऐसे हॉस्टल हैं।
देश की सामाजिक व आर्थिक स्थिति में बदलाव को देखते हुए केन्द्र सरकार की ओर से कामकाजी महिलाओं के लिए होस्टल शुरु किया गया है। हालांकि इसके तहत केन्द्र व राज्यों का हिस्सा भी होता है। बताया जाता है कि इसके लिए रकम की आवंटन के बावजूद पूरा पैसा खर्च नहीं हो पाता।
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केन्द्र की ओर से रकम का आवंटन
केन्द्र की ओर से पिछले पांच वर्षों में राज्यों को रकम आवंटित भी किए गए। इन होस्टल के लिए केन्द्र सरकार 60 फीसदी रकम आवंटित करती है। 15 फीसदी राज्य व 25 फीसदी एजेंसी का हिस्सा होता है।
वित्तीय वर्ष रकम आवंटित (लाख में)
2017-18 2695.54
2018-19 3034.10
2019-20 3254.76
2020-21 1950.78
2021-22 1203.76
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होस्टल के बारे में जागरूकता का अभाव
इसमें महिलाओं में जागरूकता की कमी दिखती है क्योंकि कई युवतियों व महिलाओं को इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दिखती है। दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि ये महिलाएं या युवतियां अपने इन हॉस्टल की बजाय अपने रिश्तेदारों या किसी जान-पहचान वालों के यहां रहना पसंद करती हों। साथ ही सुरक्षा के अभाव को लेकर भी इन्हें डर लगता हो।
संजय दवे, समाज विज्ञानी, चरखा-एनजीओ
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सराहनीय कदम, सही अर्थों में अमलीकरण जरूरी
वर्किंग वुमैन हॉस्टल केन्द्र सरकार का बहुत ही सराहनीय कदम है। हालांकि इस स्कीम का अमलीकरण सही अर्थों में होना चाहिए। इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर व सुविधाओं को बढ़ाना चाहिए। साथ ही इस संबंध में जागरूकता भी जरूरी है।
सुशीला प्रजापति, प्रमुख, एकल नारी शक्ति मंच-गुजरात
Published on:
11 Jan 2023 10:55 pm
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