
गुजरात: 2019 में प्राकृतिक खेती करने वाले थे 35 हजार, अब यह संख्या पहुंची 8.71 लाख
गांधीनगर. गुजरात में पिछले 4 वर्षों में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की तादाद में भारी वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2019 में राज्य में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की संख्या 35 हजार थी जो इस वर्ष अगस्त तक बढ़कर 8.71 लाख से ज्यादा हो गई है। इस तरह गत चार वर्षों में प्राकृतिक खेती करने वालों की संख्या में 2425 फीसदी बढोत्तरी
वलसाड के कपराडा के किसान रघुनाथ भोया ने सरकार की ओर से आयोजित प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रशिक्षण लिया। देसी गाय रखरखाव योजना का लाभ लेते हुए उन्होंने अपनी गाय के लिए प्रति वर्ष 10,800 रुपए की आर्थिक सहायता का लाभ लिया। वे कहते हैं कि प्रशिक्षण से गुजरने के बाद, उन्होंने घन-जीवामृत बनाने के लिए गाय के गोबर और गौ-मूत्र का उपयोग किया। वे इसे संग्रहित करते हैं और पूरे वर्ष अपनी फसलों के लिए इसका उपयोग करते हैं। इससे मिट्टी और सब्जियों की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है। वे इससे बेहतर आय हासिल करने में भी सक्षम बने हैं।प्राकृतिक खेती करने वाले रघुनाथ को वर्ष 2019-20 और जतिन कोळी को वर्ष 2020-21 में राज्य सरकार की ओर से सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। साथ ही जिला स्तर पर 25 हजार रुपए का चेक भी दिया गया था।
राज्य सरकार ने गुजरात में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेन्ट एजेन्सी (आत्मा) के तहत विभिन्न योजनाएं लागू की हैं। वर्ष 2020-21 में देसी गाय रखरखाव योजना के तहत सरकार ने पिछले तीन वर्षों में प्राकृतिक खेती करने वाले 1.84 लाख से अधिक किसानों को 420 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की है। इस वर्ष सरकार ने 203 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं।किसानों को इस खेती की प्रशिक्षण की सुविधा के लिए 10 ग्राम पंचायतों वाले 1466 क्लस्टर बनाए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर में दो विशेषज्ञ (एक तकनीकी और एक किसान मास्टर ट्रेनर) अपना ज्ञान और विशेषज्ञता प्रदान करते हैं। राज्य सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को खरीफ और रबी सीज़न के दौरान प्रति हेक्टेयर प्रति किसान 5000 हजार रुपए की सहायता भी प्रदान करती है।
Published on:
15 Sept 2023 09:24 pm
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