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अहमदाबाद शहर के असारवा इलाके में स्थित सिविल अस्पताल में पिछले दो दिनों में 10 मरीजों की बिना किसी चीरफाड़ के पथरी के दर्द से राहत दे दी गई। दरअसल इन मरीजों का उपचार लिथोट्रिप्सी पद्धति से किया गया। इस पद्धति में किरणों का सहारा लिया जाता है। इससे पथरी टूट जाती है और फिर वह रुटीन प्रक्रिया से ही बाहर निकल जाती है। जिससे ऑपरेशन नहीं करना पड़ता है। इस पद्धति से तीन वर्ष से लेकर 89 वर्ष तक के 10 मरीजों का सफलता पूर्वक इलाज किया गया।अहमदाबाद सिविल अस्पताल के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डाॅ. श्रेणिक शाह के अनुसार एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (ईएसडब्ल्यूएल) उपचार की ऐसी पद्धति है,जिससे किडनी और मूत्रनली में रुकी हुई पथरी को बिना किसी ऑपरेशन के तोड़ा जा सकता है। उनके अनुसार दो दिनों में मरीजों की किडनी और मूत्रनली की डेढ़ से दो सेंटीमीटर तक की पथरियों को तोड़ कर निकाल दिया गया है। ये सभी मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उनके अनुसार पथरी को तोड़ने और उसे बाहर निकालने में भी किसी तरह के ऑपरेशन या चीरफाड़ की जरूरत नहीं रहती है। यही कारण है कि मरीज जल्द से रिकवर हो जाता है और अपने काम में लग जाता है।जल्द रिकवरी, घंटों में ही दैनिक गतिविधि कर सकता है मरीजइस में पथरी के इलाज को बिना किसी ऑपरेशन के किया जा सकता है। जिससे मरीजों की स्थिति में तत्काल सुधार होता है। वह एक से दो घंटे में ही अपनी दैनिक गतिविधियों को करने लग जाता है। उपचार में जोखिम भी कम होता है। इस पद्धति से संक्रमण लगने का खतरा भी बहुत कम होता है।
दो करोड़ की आधुनिक मशीन से इलाज
अस्पताल से चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि सिविल अस्पताल में राज्य सरकार की ओर से करोड़ों रुपए के खर्च से कॉर्पोरेट स्तर की सुविधा मुहैया कराईं जा रही हैं। पथरी तोड़ने की मशीन भी लगभग दो करोड़ रुपए के खर्च से लाई गई है। इससे इस इलाज को अस्पताल सिविल अस्पताल में उपलब्ध कराया जा सका है। इससे पहले मरीजों का इस पद्धति से उपचार निजी अस्पतालों में ही होता था। भविष्य में यह प्रणाली काफी महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को भी काफी लाभ होगा। हालांकि कुछ वर्षों पहले इस तरह की मशीन थी लेकिन अब लगभग दो करोड़ रुपए के खर्च से आधुनिक मशीन लाई गई है।