
हजारों वर्षों से समुद्र से जुड़ा ओखा- बेट द्वारका आज सड़क मार्ग से जुड़ेगा
जामनगर. हजारों वर्षों से जमीन से अलग हुआ बेट द्वारका रविवार को जमीन से जुड़ेगा। ओखा से बेट द्वारका के बीच सिग्नेचर ब्रिज सुदर्शन सेतु का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों लोकार्पण होने को लेकर लोग उत्साहित हैं। यहां के लोग मोदी के स्वागत करने को उत्सुक दिखते हैं। पुष्टि संप्रदाय के सिद्धांतों के अनुसार और नाथद्वारा के श्रीनाथजी की नियमित सेवाओं और नाथद्वारा के त्योहारों के क्रम के अनुसार चली आ रही बेट द्वारका मंदिर की परंपरा हिंदू धर्म में एक उल्लेखनीय बात है। कई वर्षों के बाद मोदी इस हिंदू मंदिर में रविवार को दर्शन करेंगे।
द्वारका और बेट द्वारका समुद्र के रास्ते सीधे पाकिस्तान की सीमा से लगा हुआ क्षेत्र है। इसे ओखा मंडल क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। इस क्षेत्र के बेट द्वारका को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए 979 करोड़ की लागत से यह ब्रिज बनाया गया है।
भारत की आजादी के दौरान बेट द्वारका की जनसंख्या 45 हजार थी जो अब घटकर 10 हजार रह गई है। यहां पहुंचने के लिए अभी तक केवल समुद्र मार्ग था। इस वजह से यहां प्राथमिक सुविधा पहुंचाने में काफी दिक्कतें आ रही थीं। सालो पहले बिजली विभाग ने समुद्र में केबल डालकर बेट द्वारका को बिजली आपूर्ति कराई। कई दिक्कतों की वजह से बेट द्वारका की जन संख्या कम हो गई है। अब सुदर्शन ब्रिज के निर्माण से बेट द्वारका के लोगों का भाग्योदय होगा।
5000 बोट को रोशनी से सजाया
ओखा चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष मोहन बरई के सहयोग से डालडा में लगभग 5,000 मछली पकड़ने वाली बोट को रोशनी से सजाया गया है। बेट द्वारका और द्वारका के बीच चलने वाली 70 बोट को को भी रोशनी, राष्ट्रीय ध्वज और हिन्दू धर्म के प्रतीकों से सजाया गया है। बेट द्वारकाधीश मंदिर के अलावा यहां अन्य मंदिरों को भी रोशनी से सराबोर किया गया है। ब्रिज के नाम के मुताबिक प्रतीक के रूप में सुदर्शन चक्र की प्रतिकृति ब्रिज के पाकिंग में रखी जाएगी।
तीर्थ यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत : मुख्य पुजारी
बेट द्वारका मंदिर के मुख्य पुजारी राजू व्यास ने कहा कि बेट द्वारका में पुल के निर्माण से तीर्थयात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। बोट से आने वाले यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब इस पुल के बनने से बेट द्वारका का सफर आसान हो जाएगा। बुजुर्गों के लिए यह सफर अब सुगम और आसान होगा। साथ ही बेट द्वारका का विकास भी होगा।
बेट द्वारका निवासी कपिल राठौड़ का कहना है कि इस ब्रिज के निर्माण से स्थानीय निवासियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलेगी। लोगों का समय भी बचेगा। इस पुल का निर्माण कर असंभव को संभव बना दिया गया है। द्वारका आने वाले 70 फीसदी श्रद्धालु बेट द्वारका के दर्शन किए बिना ही लौट जाते थे जिन्हें अब इस पुल की सुविधा से दर्शन करने का सौभाग्य भी मिलेगा।
बेट द्वारका आईं मध्य प्रदेश की अर्चना गुप्ता का कहना है कि मैं दूसरी बार बेट द्वारका आई हूं। यहां पर विकास हुआ है। हम ब्रिज बनने को लेकर बहुत उत्साहित हैं। हम दोबारा यहां आएंगे।
Published on:
24 Feb 2024 11:03 pm
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