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पद्मावती फिल्म पर बढ़ा ‘फसाद’

बॉलीवुड फिल्म पद्मावती के सिनेमाघरों में दिखाए जाने की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे फिल्म पर फसाद बढ़ता जा रहा है। राजस्थान में उग्र विरोध

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Padmavati

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अहमदाबाद।बॉलीवुड फिल्म पद्मावती के सिनेमाघरों में दिखाए जाने की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे फिल्म पर फसाद बढ़ता जा रहा है। राजस्थान में उग्र विरोध के बाद राजपूतों ने चुनावी सरगर्मी के बीच गुजरात की धरती से देशभर को फिल्म के विरोध का संदेश देने की ठानी है। 12 नवंबर को गुजरात की राजधानी गांधीनगर में रामलीला मैदान में गुजरात ही नहीं बल्कि देशभर के राजपूत इकट्ठा होंगे।

करणी सेना के संस्थापक लोकेन्द्र सिंह राजपूत ने कहा कि इस फिल्म में रानी पद्मावती के चरित्र को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है। इसका पता चलते ही हमने फिल्म के निर्माताओं, निर्देशक से बात की नहीं मानीं तो अपने तरीके से इसका विरोध किया। हमारी मांग है कि इस फिल्म को सिनेमाघरों में नहीं दिखाया जाए। फिल्म में रानी पद्मावती को अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका के रूप में दिखाया जा रहा है। यह हमें फिल्म में तो क्या सपने में भी मंजूर नहीं है।

राजपूतों ने अपने खून से इतिहास लिखा है। इस पर किसी को कलंक लगाने की मंजूरी नहीं दी जाएगी। राजपूतों के इतिहास को कोई भी फिल्मकार मनोरंजन के नाम पर विकृत और गलत तरीके से प्रदर्शित नहीं कर सकता है। ऐसा हम नहीं होने देंगे। इतिहास पर बनने वाली फिल्मों के लिए सरकार को प्री-सेंसरशिप लागू करनी चाहिए। निर्माण से पहले इतिहासकार, कानूनविद, समाज संगठन के प्रतिनिधियों को दिखाने के बाद उनकी सहमति के बाद ही मंजूरी देनी चाहिए। इस फिल्म को लेकर पूरे देश में विरोध है। राजस्थान की धरती पर इस संदर्भ में कड़ा संदेश देने के बाद अब हम गुजरात की धरती पर आए हैं। क्योंकि गुजरात देख के लिए सबकुछ तय कर सकता है।

सेना के राजस्थान के प्रदेश महासचिव जितेन्द्र सिंह कारंगा ने कहा कि इस फिल्म में महारानी पद्मावती का अपमान किया जा रहा है। इसे राजपूत समाज सहन नहीं करेगा। इसको लेकर गुजरात के गांधीनगर में राजपूतों का सम्मेलन होने जा रहा है। इसकी तैयारियों के लिए राजपूतों के संगठनों के साथ बातचीत करने के लिए अहमदाबाद पहुंचे हैं। यह सम्मेलन गुजरात के इतिहास में राजपूतों का अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन होगा।


फिल्म ‘पद्मावती’ का मुद्दा पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

जाने-माने निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली की महत्वाकांक्षी फिल्म ‘पद्मावती’ विवादों के घेरे में है। राजपूत समाज इसे फिल्म के विरोध में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। अहमदाबाद सहित राज्य के राजपूत समाज के करीब एक दर्जन लोगों ने फिल्म के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

सिद्धराज सिंह चुडासमा व अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि केन्द्र सरकार प्रसिद्ध इतिहासकारों और सामाजिक रूप से प्रबुद्ध लोगों की समिति बनाए और इस समिति को यह फिल्म दिखाई जाए। याचिका के मुताबिक राजपूत महिलाओं के गौरवशाली इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।

अलाउद्दीन खिलजी से अपनी रक्षा के लिए पद्मावती सहित राजपूत वीरांगनाओं को जौहर किए जाने का इतिहास है वहीं इस फिल्म में रानी पद्मावती के रूप में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण घूमर नृत्य में अंग प्रदर्शन से राजपूत की भावना को ठेस पहुंची है। इसलिए इस याचिका की सुनवाई पूरी होने तक इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए। फिल्म एक दिसम्बर को सिनेमा घरों में रिलीज होने वाली है।

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