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कार्बन के बढ़ते उत्सर्जन को रोकने के उपायों पर पीडीईयू में हुआ मंथन

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कार्बन के बढ़ते उत्सर्जन को रोकने के उपायों पर पीडीईयू में हुआ मंथन

कार्बन के बढ़ते उत्सर्जन को रोकने के उपायों पर पीडीईयू में हुआ मंथन

अहमदाबाद. पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी (पीडीईयू) में शुक्रवार व शनिवार को आयोजित दो दिवसीय कार्बन अवशोषण, संग्रहण एवं उपयोग-इंडो कैनेडियन रिसर्च कॉन्क्लेव में सीओ2 (कार्बन डाइ ऑक्साइड) के बढ़ते उत्सर्जन को रोकने के उपायों पर मंथन हुआ।
पीडीईयू के महानिदेशक एस.एस.मनोहरन ने बताया कि पीडीईयू भी कार्बन अवशोषण (कार्बन कैप्चर) और उसके संग्रहण पर काम कर रहा है। इसके लिए विवि में सीओ2 ग्रुप बनाया गया है। उन्होंने देश एवं विदेश के वातावरण में बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए सौर ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बायो ऊर्जा सरीखे विकल्पों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। ताकि कार्बन का उत्सर्जन कम से कम हो।
शास्त्री इंडो कनाडाई संस्थान की निदेशक डॉ प्राची कौल ने सीओ2 की समस्या को कम कर वर्ष २०५० तक शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में बढऩे के लिए शुरू हुए प्रयासों की सराहना की।
भारत के मिशन इनोवेशन के सलाहकार डॉ डी के तुली ने कहा कि भारत में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के साथ वातावरण से कार्बन को कम करने के भी प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने सीओ2 को खत्म करने के विकल्प में शैवाल के बारे में बात की और यह भी बताया कि सरकार ने कार्बन समस्या को खत्म करने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (जीबीटी) के माध्यम से काफी धनराशि शोध, इनोवेशन के लिए प्रस्तावित की है।
इस कॉन्क्लेव के समन्वयक डॉ आशीष उनडकट ने भारत में कार्बन अवशोषण के अवसर के बारे में जानकारी दी। भारत तथा कनाडा के वक्ताओं का परिचय दिया। कई वक्ताओं ने कार्बन अवशोषण, संग्रहण के साथ उसके उपयोग में कारगर साबित हो रहीं नई तकनीकों की जानकारी दी। कईयों को प्रदर्शित भी किया।
कॉन्क्लेव के दौरान आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी गांधीनगर, सीएसएमसीआरआई-सीएसआईआर भावनगर, आईएआई-गांधीनगर, एनईईआरआई नागपुर के विद्यार्थियों की ओर से वातावरण में मौजूद कार्बन को अवशोषित करने, उसे संग्रहित करने की दिशा में हो रहे कार्यों की जानकारी दी।