
ahmedabad
अहमदाबाद।राज्य के नामी तकनीकी संस्थानों में शुमार पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी (पीडीपीयू) और धीरूभाई अंबानी इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फोर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (डीएआईआईसीटी) में प्रवासी भारतीय (एनआरआई) कोटे की सीटों पर प्रवेश लेने वाले 138 विद्यार्थियों का प्रवेश अधर में लटक गया है। इन विद्यार्थियों के प्रवेश रद्द भी हो सकते हंै।
ऐसा इसलिए है क्योंकि इन दोनों ही नामी संस्थानों ने गुजरात सरकार की ओर से जारी बेचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटेक) के प्रवेश नियमों को दरकरार करते हुए मनमाने तरीके से इस साल भी 15 प्रतिशत सीटों पर एनआरआई विद्यार्थियों को प्रवेश दे दिया है। पीडीपीयू ने जहां एनआरआई कोटे में 108 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया है, वहीं डीएआईआईसीटी ने 30 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया है। जबकि राज्य सरकार ने इस साल एनआरआई कोटा ही रद्द कर दिया है। राज्य सरकार की ओर से व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश देने व उन पर निगरानी रखने के लिए जिम्मेदार व्यावसायिक पाठ्यक्रम प्रवेश समिति (एसीपीसी) की भी नींद गुरुवार को तब जाकर टूटी, जब इन दोनों ही संस्थानों की ओर से एनआरआई कोटे पर प्रवेश की प्रक्रिया पूर्ण कर दी। जबकि जून महीने से ही ये दोनों ही संस्थान वेबसाइट के जरिए फॉर्म आमंत्रित कर रहे थे।
इस पर भी एसीपीसी ने इन दोनों ही संस्थानों को नोटिस जारी करने की जगह सिर्फ विद्यार्थियों के नाम सार्वजनिक नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री मान ली है। इस नोटिस में विद्यार्थियों को चेताया है कि वो इन दोनों ही संस्थानों में एनआरआई कोटे की सीटों पर प्रवेश ना लें। क्योंकि इस साल इन दोनों ही संस्थानों में एनआरआई सीटों का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद भी यदि इन सीटों पर विद्यार्थी प्रवेश लेंगे तो वो रद्द किया जा सकता है।
प्रवेश दिए हैं, सरकार से मांगेंगेमंजूरी: शाह
पीडीपीयू के कुलसचिव तरुन शाह से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि पीडीपीयू ने एनआरआई सीटों पर108 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया है। जहां तक इस साल मंजूरी ना देने की बात है तो वो सरकार में इस बाबत अपना पक्ष रखेंगे कि पीडीपीयू के साथ दोहरा रवैया ना अपनाया जाए। पीडीपीयू भी एक निजी संस्थान है, जैसे कि अन्य संस्थान। जब अन्य संस्थानों को एनआरआई कोटे की मंजूरी है तो फिर पीडीपीयू को क्यों नहीं। शाह ने कहा कि वो इन 108 एनआरआई सीटों पर प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों का भविष्य बिगडऩे नहीं देंगे। जरूरी हर लड़ाई संस्थान इनके प्रवेश की वैधता के लिए लड़ेगा।
एनआरआई कोटा रद्द होने की जानकारी नही
डीएआईआईसीटीई के कार्यकारी कुलसचिव नायर सोमन बताते हैं कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि गुजरात सरकार ने उनके संस्थान के 15 प्रतिशत एनआरआई कोटे को रद्द कर दिया है। उन्होंने गत वर्ष के तहत ही नियमों के अधीन रहते हुए एनआरआई सीटों पर 30 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया है। जहां तक एसीपीसी की बात है तो उन्हें ये जानकारी नहीं है कि उन्होंने किस नियम के तहत डीएआईसीटीई के एनआरआई कोटे को रद्द किया है।
पता चलते ही चेताया
एसीपीसी के सदस्य सचिव डॉ. जी.पी. वडोदरिया कहते हैं कि उन्हें हाल ही में पता चला कि ये दोनों ही संस्थान वेबसाइट के जरिए एनआरआई कोटे की सीटों पर प्रवेश देने के लिए प्रक्रिया कर रहे हैं। जबकि इस साल इनका एनआरआई कोटा रद्द कर दिया गया है। बीई-बीटेक के इस साल 2016-17 के प्रवेश नियमों में भी इसका स्पष्ट उल्लेख है। इसके चलते फिलहाल विद्यार्थियों को चेताया है। यदि संस्थानों ने वाकई में प्रवेश दे दिया होगा तो इन्हें भी नोटिस जारी किया जाएगा। इनका प्रवेश रद्द हो सकता है।
तगड़ी फीस, फिर भी प्रवेश पर तलवार
इन दोनों ही संस्थानों की एनआरआई सीटों पर प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। इनके प्रवेश के रद्द होने की संभावना बढ़ गई है। दोनों ही संस्थानों में एनआरआई कोटे की सीट भी तंगड़ी है। पीडीपीयू में जहां छह महीने की तीन हजार डॉलर ट्यूशन फीस और 22 हजार रुपए यानि करीब दो लाख रुपए फीस वसूली गई है। वहीं डीएआईसीटीई में छह महीने की पांच हजार डॉलर ट्यूशन फीस सहित 6650 डॉलर यानि करीब चार लाख रुपए फीस है।
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