
गिर अभ्यारण्य स्थित सिंघोड़ा बांध को गहरे करने की प्रक्रिया को चुनौती
अहमदाबाद. गिर अभ्यारण्य स्थित सिंघोड़ा बांध को गहरा करने के लिए जारी प्रक्रिया को गुजरात उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। मगरमच्छ की अच्छी खासी संख्या वाले इस बांध के आस-पास करीब 10 शेरों का ठिकाना है। ऐसी परिस्थिति में इस प्रक्रिया के कारण पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इस प्रक्रिया को रोकने के लिए उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है।
न्यायाधीश ए. जे. शास्त्री ने गुरुवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान इस मामले को उचित कोर्ट के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया। शैलेन्द्रसिंह जाडेजा की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि गिर अभ्यारण्य में सिंघोड़ा बांध को गहरा करने को लेकर गिर सोमनाथ जिला कलक्टर की ओर से गत 8 मार्च को एक परिपत्र जारी किया गया। प्रशासन की ओर से एक ही दिन में 1000 ट्रैक्टर मिट्टी निकालने का आयोजन किया गया था। यह डैम गिर अभ्यारण्य में स्थित है। बांध के आस-पास शेर रहते हैं वहीं इस बांध में कई मगरमच्छ का आश्रय स्थल है। इस बांध पर अन्य पशु पक्षी भी निर्भर हैं। इन परिस्थितियों में बांध का पानी बाहर निकालकर बाहर फेंकने कर गहरा करने से मगरमच्छ का जीवन खतरे में पड़ जाएगा। शेर भी अपने प्राकृतिक इलाके में रहते हैं जिससे उन्हें भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन वन्य जीवों के जीवन को खतरे में डालकर यहां पर कोई विकास नहीं किया जा सकता। यह कार्य वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अनुरुप नहीं है। जल संग्रह योजना के तहत मुख्यमंत्री भी इस बांध के दौरे पर आने वाले हैं। राज्य सरकार की यह योजना काफी अच्छी है, लेकिन इस कार्य को गिर अभ्यारण्य के भीतर मंजूरी नहीं दी जा सकती। इस जनहित याचिका में राज्य सरकार के वन व पर्यावरण विभाग, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव), मुख्य वन संरक्षक-जूनागढ़ वन्य जीव क्षेत्र, गिर डिवीजन के वन उपसंरक्षक व कलक्टर को प्रतिवादी बनाया गया है।
Published on:
24 May 2018 10:54 pm
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