
चाय के प्लास्टिक की कप की जगह ले रहे कुल्हड़
गांधीनगर. चाहे अहमदाबाद महानगरपालिका हो या गांधीनगर महानगरपालिका ऐसे शहरी इलाकों में चाय के प्लास्टिक कपों की रोक लगा दी गई है।ऐसे में दशकों पहले जो मिट्टी के कुल्हड़ बाजार से गायब हो थे अब चाय की दुकानों पर ये कुल्हड़ नजर आने लगे हैं। हालांकि अभी कुल्हड़ की मांग ज्यादा नहीं है, लेकिन चलन जरूर शुरू हो गया है। वहीं पिछले एक दशक से प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की प्रतिमा पर भी राज्य सरकार की ओर से रोक लगने के बाद मिट्टी की प्रतिमाओं का भी चलन बढ़ा है। ऐसे में मिट्टी की प्रतिमाएं और कुल्हड़ की मांग को पूरा करने के लिए गुजरात माटीकाम कलाकारी और रूरल टेक्नोलॉजी संस्था ने भी बीड़ा उठाया है । इसके लिए इस संस्था ने कुल्हड़ मेकिंग पायलट प्रोजेक्ट प्रारंभ किया है, जिसमें राज्यभर में करीब ढाई सौ कारीगरों को मिट्टी के कुल्हड़ बनाने का 10 दिनों तक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।मौजूदा समय में मोरबी, डीसा, सरखेज, तिलकवाडा, आणंद जैसे कई जगहों पर कुल्हड़ बनाने का कार्य चल रहा है, जहां हर रोज हजारों की संख्या में कुल्हड़ बनाए जा रहे है।
संस्था के निदेशक जे.एच. रावल ने कहा कि अब मिट्टी के नमूनों की मांग बढ़ने लगी है। चाहे मिट्टी से बनी इको फ्रेंडली प्रतिमा हो या कुल्हड़ हो। विशेषतौर पर यहां जरूरतमंदों को मिट्टी कार्य प्रशिक्षण दिया जाता है। इको फ्रेंडली के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए क्ले आइडोल प्रोजेक्ट प्रारंभ किया गया है। इसके मद्देनजर मिट्टी कार्य करनेवाले कारीगरों को पचास फीसदी सब्सिडी दी जाती है, जिसमें मिट्टी और बिक्री के लिए स्टॉल दिए जाते हैं। कुल्हड़ के अलावा मिट्टी से बनी प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं, जो अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत जैसे शहरों में भेजे जाते है। कारीगरों को इसमें मदद भी की जाती है।
Published on:
27 May 2023 10:55 pm
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