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पीएम मोदी ने बताया: मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या थीं उनकी दो इच्छाएं?

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पीएम मोदी ने बताया: मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या थीं उनकी दो इच्छाएं?

पीएम मोदी ने बताया: मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या थीं उनकी दो इच्छाएं?

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने तो उनकी दो व्यक्तिगत इच्छाएं थीं। एक बचपन में जो मेरे साथ स्कूल में पढऩे वाले मेरे दोस्त थे, उनको वे सीएम के घर बुलाऊं। क्योंकि वे एक परिव्राजक थे और उनका नात सबसे टूट चुका था। तीन-तीन दशक बीच में बीत गए थे, तो उनका मन कर गया कि उन पुराने दोस्तों को याद करें। दूसरी इच्छा थी कि मेरे सभी शिक्षकों को वे अपने घर बुलाएं और उनका सम्मान करें। उन्हें खुशी है कि उस समय जब उन्होंने अपने शिक्षकों को बुलाया तब एक शिक्षक की उम्र 93 थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी मैं एक ऐसा विद्यार्थी हूं जो शिक्षकों के साथ जीवन संपर्क में हैं।

गांधीनगर के पास शुक्रवार को अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के 29वें द्विार्षिक राष्ट्रीय शैक्षणिक अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गूगल से डेटा मिल सकता है, लेकिन निर्णय तो खुद ही लेना पड़ता है। एक गुरु ही छात्र को गाइड कर सकता है कि वह अपनी जानकारियों का सही उपयोग कैसे करे। तकनीक से सूचना मिल सकती है लेकिन सही दृष्टिकोण तो शिक्षक ही दे सकता है। आजादी के अमृतकाल में जब भारत विकसित होने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब शिक्षकों की भूमिका बहुत बड़ी है। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक शिक्षक ही बच्चों को ये समझने में मदद कर सकता है कि कौन सी जानकारी उपयोगी है और कौन सी नहीं है। कोई भी तकनीक किसी विद्यार्थी की पारिवारिक स्थिति को नहीं समझ सकती। एक गुरु ही उसके हालात को समझकर उसे सभी मुश्किलों से बाहर निकलने के लिए प्रेरित कर सकता है। दुनिया की कोई भी तकनीक ये नहीं सिखा सकती कि किसी विषय की गहराई में जाकर उसे कैसे समझें।

मैं आजीवन विद्यार्थी

उन्होंने कहा कि आमतौर पर विदेशों के नेताओं से जब वे मिलते हैं तब उनके जीवन में भारतीय शिक्षकों के योगदान के बारे में बड़े गर्व के साथ वो वर्णन करते हैं। मोदी ने कहा कि वे स्वयं शिक्षक नहीं हैं, लेकिन वे गर्व से कहते हैं कि वे एक आजीवन विद्यार्थी हैं।