
अजमेर इन्टरसिटी में झलकेगी राजस्थानी व गुजराती संस्कृति
अहमदाबाद. अहमदाबाद से अजमेर के बीच दौडऩे वाली इन्टरसिटी ट्रेन में अब राजस्थान और गुजरात की संस्कृति की झलक नजर आएगी। मौजूदा समय साबरमती स्टेशन के इस ट्रेन के दो कोचों पर पेन्टिंग की जा रही है। नई दिल्ली से बिहार तक जानी वाली संपर्क क्रांति मिथिला की मधुबनी पेंटिंग की तर्ज पर यह पेन्टिंग की जा रही है। इसका मकसद गुजरात और राजस्थान की पेन्टिंग्स उकेरकर इन राज्यों की कला संस्कृति की उजागर करना है।
ट्रेन के कोच में जहां एक ओर गुजरात की पेन्टिंग हैं, जिसमें ग्रामीण संस्कृति की झलक नजर आ रही है। गुजराती पेन्टिंग में कच्छी महिलाओं को सिर पर पल्लू डाले दिखाया गया। वहीं एशियाई शेर की झलक नजर आती है। एशियाई शेर विशेष तौर पर जूनागढ़ के सासणगीर में होते हैं, जो गुजरात की अलग की पहचान हैं। साथ ही परम्परागत काठियावाडी वेशभूषा में महिलाओं और पुरुषों को गरबा में झूमते दिखाया है। कहीं पर ढोल बजाता ढोली और परंपरागत ग्रामीण वेशभूषा में झूमती महिला को उकेरा गया। अहमदाबाद की पहचान मानी जाने वाली सिद्धि सैयद की जाली को भी कोच पर उकेरा गया तो पक्षियों के दाना चूनने की चबूतरा और सारंग बजाता व्यक्ति भी आकर्षण का केन्द्र बना है। वहीं खिड़कियों पर सफेद रंग से रंगा गया और उसके आसपास बारीक पेन्टिंग है और उसके ऊपर हिस्से में बांधनवार की पेन्टिंग नजर आती है।
आईडी आटर्््स के चित्रकार प्रतीक राठौड़ ने बताया कि पिछले दस दिनों से इस कोच पर अपने दस चित्रकारों के साथ चित्र उकेर रहे हैं। करीब सत्तर-अस्सी हजार रुपए कोच तैयार कर रहे हैं। वे बताते हैं कि हर देश और हर राज्य की अपनी कला संस्कृति होती है। मंडल रेल प्रबंधक दीपक झा यह कंसेप्ट बताया था, जो उन्हें काफी पसंद आया है। यह ट्रेन राजस्थान और गुजरात के बीच दौड़ती है, जिससे इसमें गुजरात की भवाई, रंगोली और वहीं राजपूताना धरती राजस्थान की झलक कोच के दूसरे हिस्से में उकेरी जा रही है, जिसमें किले के साथ चारों दीवारें उकेरी गई, जिसमें केसरी रंग से पेन्टिंग है। वहीं सजे-धजे ऊंट-हाथी और बैल को भी उकेरा गया। राजस्थानी वेशभूषा में महिलाएं सिर पर मटकी लेकर जाती नजर आ रही है। एशियाई शेरों को उकेरा है।
वहीं राजस्थान का रजवाडा, आमेर का किला, शाही सवारी को उकेरा गया है। जनता के नजरिया परखने के बाद ट्रेन के अन्य १४ कोचों में भी ऐसी ही पेन्टिंग की जाएगी।
अहमदाबाद मंडल के जनसंपर्क अधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि डीआरएम दीपक झा का यह कंसेप्ट था, कि जिस तरीके से मिथिला की मधुबनी पेन्टिंग है उसी तर्ज अहमदाबाद मंडल की ट्रेनों में कला- संस्कृति को उकेरा जाए। अगले सप्ताह तक अहमदाबाद-अजमेर इन्टरसिटी ट्रेन में ये कोच लगाए जाएंगे।
गुजराती पेन्टिंग में कच्छी महिलाओं को सिर पर पल्लू डाले दिखाया गया। वहीं एशियाई शेर की झलक नजर आती है। एशियाई शेर विशेष तौर पर जूनागढ़ के सासणगीर में होते हैं, जो गुजरात की अलग की पहचान हैं। साथ ही परम्परागत काठियावाडी वेशभूषा में महिलाओं और पुरुषों को गरबा में झूमते दिखाया है। कहीं पर ढोल बजाता ढोली और परंपरागत ग्रामीण वेशभूषा में झूमती महिला को उकेरा गया। अहमदाबाद की पहचान मानी जाने वाली सिद्धि सैयद की जाली को भी कोच पर उकेरा गया तो पक्षियों के दाना चूनने की चबूतरा और सारंग बजाता व्यक्ति भी आकर्षण का केन्द्र बना है। वहीं खिड़कियों पर सफेद रंग से रंगा गया और उसके आसपास बारीक पेन्टिंग है और उसके ऊपर हिस्से में बांधनवार की पेन्टिंग नजर आती है।
वहीं राजपूताना धरती राजस्थान की झलक कोच के दूसरे हिस्से में उकेरी जा रही है, जिसमें किले के साथ चारों दीवारें उकेरी गई, जिसमें केसरी रंग से पेन्टिंग है। वहीं सजे-धजे ऊंट-हाथी और बैल को भी उकेरा गया। राजस्थानी वेशभूषा में महिलाएं सिर पर मटकी लेकर जाती नजर आ रही है। एशियाई शेरों को उकेरा है।
Published on:
07 Jun 2019 08:14 pm
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