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राजकोट अग्निकांड एक मानव सृजित आपदा: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात उच्च न्यायालय ने इस हृदय विदारक घटना पर संज्ञान लिया है। राजकोट के साथ अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत मनपा, राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

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राजकोट के नाना मौवा इलाके के टीआरपी गेम जोन अग्निकांड मामले में 32 लोगों की मौत पर गुजरात उच्च न्यायालय ने संज्ञान (सुओ मोटो) लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। इस हृदय विदारक दुर्घटना पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के न्यायाधीश बीरेन वैष्णव और न्यायाधीश देवन देसाई ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया यह मानव सृजित आपदा है। इसमें कई लोगों की जान चली गई।

खंडपीठ ने इस मामले में राजकोट महानगर पालिका के साथ, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत महानगर पालिका और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। उन्हें सोमवार को अपना जवाब पेश करने को कहा है।राजकोट अग्निकांड मामले में गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रिजेश त्रिवेदी और वकील अमित पंचाल ने खंडपीठ से इस मामले को जनहित याचिका के तौर पर लेने की गुहार लगाई थी। इस पर रविवार को अवकाश होने पर भी खंडपीठ ने विशेष सुनवाई करते हुए मामले पर संज्ञान लिया है।

किन नीति-नियमों के तहत गेमिंग जोन को दी जा रही मंजूरी

खंडपीठ ने अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, राजकोट महानगर पालिका और राज्य सरकार से पूछा कि वे बताएं कि किन कानून के किन प्रावधानों (नीति-नियमों) के तहत वे अपने क्षेत्राधिकार में ऐसे गेमिंग जोन, मनोरंजन सुविधाओं को बनाने, जारी रखने और उन्हें उपयोग में लाने की मंजूरी दे रहे हैं। महानगर पालिकाएं ये भी बताएं कि क्या संबंधित अथॉरिटी ने इन्हें लाइसेंस दिए हैं, इस दौरान क्या इन गेमिंग जोन में फायर सेफ्टी व अन्य नीति नियमों की पालना को सुनिश्चित किया गया।

अहमदाबाद के गेमिंग जोन भी सुरक्षा के लिए खतरनाक

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि राजकोट ही नहीं अहमदाबाद शहर के सिंधु भवन रोड, सरखेज गांधीनगर हाईवे और एस पी रिंग रोड पर स्थित गेमिंग जोन भी सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं। यह विशेष रूप से मासूम बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं।

जीडीसीआर में खामियों का उठाया लाभ

खंडपीठ ने कहा कि हम अखबार की रिपोर्ट पढ़कर हैरान हैं, जो इंगित करती है कि राजकोट में गेमिंग जोन ने अवैध मनोरंजक गतिविधियों के निर्माण के लिए गुजरात कॉम्प्रिहेंसिव जनरल डेवलपमेंट कंट्रोल रेग्युलेशन (जीडीसीआर) में खामियों का फायदा उठाया है। ये सभी अथॉरिटी की योग्य मंजूरियों के बिना चल रहे थे। टीन के शेड में काम चलाऊ स्ट्रक्चर में इन्हें चलाया जा रहा था। राजकोट के गेम जोन में तीव्र ज्वलनशील पदार्थ, ईंधन, टायर, फाइबर ग्लास थे।

वेल्डिंग के बावजूद प्रवेश, सिटिंग जज से जांच की मांग

गुजरात हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रिजेश त्रिवेदी ने उदयपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होते हुए मांग की कि मामले की जांच सिटिंग जज से कराई जाए। उन्होंने कहा कि राजकोट का टीआरपी गेमिंग जोन आवासीय भूखंडों पर बनाया गया है। वेल्डिंग और अन्य कार्य जारी होने के बावजूद लोगों को गेमिंग जोन में प्रवेश करने की अनुमति दी गई। टीआरपी के गेमिंग जोन में ज्वलनशील पदार्थ भी थे। हजारों लीटर डीजल , पेट्रोल था। प्रवेश और निकास का स्थान बहुत संकीर्ण था। फायर सेफ्टी के पंप को पैकिंग से बाहर तक नहीं निकाला गया।