
Rajkot Lok Sabha seat
राजकोट. लोकसभा चुनाव का प्रचार-प्रचार जोरों पर है। चैत्र की गर्मी में भी उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ गांव-गांव घूम रहे हैं। ऐसे में राजकोट लोकसभा सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा के बीच माना जा रहा है। पाटीदार बहुल इस सीट पर कांग्रेस ने भी पाटीदार प्रत्याशी को मैदान में उतारा है, तो भाजपा ने भी पाटीदार उम्मीदवार को टिकट दिया है। ऐसे में लगता है कि यहां पर कांग्रेस-भाजपा नहीं, अपितु पाटीदार बनाम पाटीदार के बीच ही चुनावी मुकाबला है।
मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की कर्मभूमि राजकोट सीट से भाजपा ने जहां वर्तमान सांसद मोहनभाई कुंडारिया पर पुन: विश्वास व्यक्त किया है, तो कांग्रेस ने भी टंकारा के विधायक ललितभाई कगथरा को चुनावी मैदान में उतारा है। टंकारा क्षेत्र केे दोनों प्रत्याशी कड़वा पटेल समाज से हैं और राजनीति में माहिर माने जाते हैं।
सात विधानसभा शामिल :
इस लोकसभा सीट में सात विधानसभा सीट शामिल हैं, जिनमें टंकारा, वांकानेर, जसदण, राजकोट पूर्व, राजकोट पश्चिम, राजकोट दक्षिण व राजकोट ग्रामीण विधानसभा शामिल है। वर्ष २०१७ में हुए लोकसभा चुनाव में टंकारा, वांकानेर व जसदण में कांग्रेस की जीत हुई थी, जबकि राजकोट की चारों सीटों पर भाजपा की जीत हुई थी। इस बीच, जदसण के कांग्रेस विधायक व कोळी समाज के अग्रणी कुंवरजी बावळिया ने कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा का खेस धारण किया,जिससे उस सीट पर हुए उपचुनाव में पुन: कुंवरजी बावळिया विजयी होने से अब कांग्रेस के पास सिर्फ दो ही विधानसभा सीट (टंकारा व वांकानेर) रह गई हैं।
मतदाताओं की स्थिति :
राजकोट लोकसभा सीट पर कुल १८ लाख ६५ हजार ७१० मतदाता हैं, जिनमें ९ लाख ७० हजार ९५८ महिला, ८ लाख ९४ हजार ७३६ पुरुष व १६ किन्नर शामिल हैं। जातिगत समीकरण की बात करें तो यहां पर सबसे ज्यादा पाटीदार समाज के मतदाता हैं, जिनकी संख्या ५ लाख ५० हजार है। इसके अलावा, कोळी समाज के ३ लाख, क्षत्रिय समाज के एक लाख २० हजार, दलित समाज के १ लाख १० हजार, रघुवंशी समाज के १.१० लाख, ब्राह्मण समाज के एक लाख व जैन समाज के ८० हजार मतदाता हैं।
मोहनभाई के विरुद्ध कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे ललित कगथरा भी टंकारा के विधायक हैं। वर्ष २०१२ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से नाराज होकर कगथरा निर्दलीय चुनाव लड़े थे और १५ हजार से अधिक वोट हासिल किए गए थे। बाद में वर्ष २०१७ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने टंकारा से कगथरा को टिकट दिया और पाटीदार आरक्षण आंदोलन की आंधी का उनको फायदा मिला था।
इस सीट में राजकोट, जसदण, पडधरी, विंछीया, टंकारा, वांकानेर, लोधिका एवं कोटडा सांगाणी सहित आठ तहसील पंचायत व राजकोट जिला पंचायत पर कांग्रेस की सत्ता थी। इनमें से राजकोट व लोधिका तहसील पंचायत में नाराजगी सामने आई और तहसील पंचायत के कांग्रेस के सदस्य भाजपा में मिलने से राजकोट पंचायत पर भाजपा का कब्जा हो गया।
स्थानीय समस्या :
राजकोट जिले में फसल बीमा के कारण गांवों में रोष व्याप्त है। ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की समस्या को लेकर भी लोगों में आक्रोश व्याप्त है। जाति आधारित समीकरण, किसानों की समस्या व पानी की समस्या को लेकर जारी रोष का किसको फायदा व किसको नुकसान होगा, यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा।
१९६२ से अब तक सात बार भाजपा व ६ बार कांग्रेस :
वर्ष १९६२ से लेकर वर्ष २०१४ के दौरान हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट पर सात बार भाजपा एवं छह बार कांग्रेस की जीत हुई है, जबकि एक बार निर्दलीय प्रत्याशी व एक बार भारतीय लोक दल के उम्मीदवार सांसद चुने गए।
वर्ष १९६२ में कांग्रेस प्रत्याशी उछरंगराय ढेबर विजयी बनी थे। इसके बाद १९६७ के चुनाव में निर्दलीय मीनु मसाणी, १९७१ में कांग्रेस के घनश्याम ओझा, १९७२ में कांग्रेस के पीएसके मोहनलाल, १९७७ में भारतीय लोकदल से केशुभाई पटेल, १९८० में कांग्रेस के रामजीभाई मावाणी, १९८४ में कांग्रेस की रमाबेन मावाणी, १९८९ में भाजपा के शिवलाल वेकरिया, १९९१ में पुन : भाजपा के शिवलाल वेकरिया, १९९६ से लेकर वर्ष २००४ तक अर्थात लगातार चार बार भाजपा के डॉ. वल्लभ कथीरिया विजयी हुए। इसके बाद वर्ष २००९ के चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस ने पुन: सत्ता हासिल की और कांग्रेस प्रत्याशी कुंवरजी बावळिया की जीत हुई थी। बाद में गत चुनाव में अर्थात वर्ष २०१४ में पुन: भाजपा ने इस सीट को कब्जे में ले लिया और भाजपा के मोहनभाई कुंडारिया सांसद चुने गए।
Published on:
15 Apr 2019 04:00 am
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