
अहमदाबाद : बारीक नक्काशी का नमूना है रानी सिप्री की मस्जिद
अहमदाबाद. शहर में स्थित अनेक मस्जिद प्रचीन इतिहास को समेटे हुई हैं। कोई अपनी नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है तो कोई अपनी प्राचीनता एवं राजाशाही की यादों को समेटे हुई हैं। उन्हीं में से एक है रानी सिप्री की मस्जिद, जो अपनी नक्काशी के लिए अहमदाबाद सहित देश में ही नहीं, अपितु विदेशों में भी प्रसिद्ध है, लेकिन फिलहाल मस्जिद को मरम्मत की जरुरत है। मस्जिद के सामने स्थित रानी के मकबरा की हालत खराब होने लगी हैं। छत पर बनी कुछ जालियां तो टूट भी गई हैं। अंदर की हालत में कुछ ठीक नहीं हैं, क्योंकि बारिश के दौरान पानी गिरता है।
शहर के आस्टोडिया दरवाजा के निकट स्थित राणी सिप्री की मस्जिद का निर्माण करीब ५०० वर्ष पूर्व गुजरात के सातवें सुल्तान महमूद बेगड़ा (१४५८-१५११) की बेगम सिप्री के नाम पर हुआ था, जहां उनका (सिप्री) मकबरा भी बना हुई है। १२ पिलरों पर खड़ी मस्जिद में छह गुम्बद हैं और दोनों ओर खड़ी मीनारें मस्जिद की शोभा को और बढ़ा रही हैं। मस्जिद एवं रानी के मकबरा में की गई नक्काशी इतनी बारिक एवं कलात्मक है कि उसे देखने के लिए विदेशी पर्यटक भी आते हैं और यहां की नक्काशी को अपने कैमरे में कैद कर ले जाते हैं। यहां लिखे लेख के अनुसार रानी का नाम शुभा राई था।
मस्जिद एवं मकबरा में लाल पत्थर पर की गई बारीक नक्काशी के चलते मस्जिद देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है। रानी के मकबरा में भी १२ पिलर है। चारों कोनों पर बने चार कुम्बजों के अलावा एक गुम्बज बीच में भी है, जो मकबरा की शोभा को और बढ़ा रहा है।
मस्जिद ए- नगीना की तरह है यह मस्जिद
अपनी बारीक नक्काशी के लिए इसे मस्जिद -ए- नगीना की तरह भी जाना जाता है।
स्टोर रूम की जरुरत, मकबरा में गिरता है पानी
कलात्मक एवं बारीक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध यह मस्जिद हेरीटेज में शामिल हैं, लेकिन फिलहाल इसे मरम्मत की जरुरत है। मस्जिद की एक मीनार का गुम्बद टूटा हुआ है। इसी तरह मकबरे की हालत भी बिना मरम्मत के खराब होने लगी है। मकबरे की छत पर लगी कुछ जालियां टूट गई हैं। हालात यह हैं कि बारिश के दौरान मकबरे में पानी गिरता है। साथ ही एक स्टोर रूम की जरुरत भी है, लेकिन अभी तक नहीं बना है। पुरातत्व विभाग में भी इस संबंध में शिकायत की गई, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में जरुरत है इस कलात्मक नक्काशी को बनाए रखने की, जिसे आगामी पीढ़ी भी देख सकें।
-मोहम्मद इकबाल चित्तौड़वाले, ट्रस्टी, राणी सिप्री की मस्जिद ट्रस्ट।
Published on:
06 Jun 2019 10:39 pm
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