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प्रेमिका के लिए वेलेन्टाइन डे पर की पत्नी की हत्या, 15 साल बाद हुई गिरफ्तारी

क्राइम ब्रांच ने बैंग्लूरु से पकड़ा, मित्र का नाम अपनाकर छिपा था,पत्नी की हत्या करने पर प्रेमिका ने भी जताई थी नाराजगी

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प्रेमिका के लिए वेलेन्टाइन डे पर की पत्नी की हत्या, 15 साल बाद हुई गिरफ्तारी

अहमदाबाद. शहर के बोपल इलाके में 15 साल पहले प्रेमिका को पाने के लिए वेलेन्टाइन डे के दिन 14 फरवरी २००३ में पत्नी सजनी की हत्या करने के मामले में वांछित तरुण जीनराज को क्राइम ब्रांच ने आखिरकार बैंग्लूरु से गिरफ्तार कर लिया। पत्नी सजनी की हत्या की बात प्रेमिका को बताने पर वो और भी नाराज हो गई, जिससे तरुण भूगर्म में चला गया था।
हत्या से चार महीने पहले ही तरुण का विवाह सामाजिक रीति रिवाज से उसी की जाति की सजनी से हुआ था। इस मामले में तरुण के माता-पिता, भाई और भाभी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। ये १५ साल से फरार चल रहा था।
वेलेन्टाइन डे का दिन होने से तरुण बाहर खाना खाने गया था। बाद में अपने भाई अरुण और भाभी रूपकांता के साथ बोपल स्थित घर पहुंचा था। घर का दरवाजा थोड़ा खुला मिला, अंदर जाने पर सजनी का शव बैड पर पड़़ा हुआ दिखा, गले में दुपट्टा लिपटा था। सामान तितर-बितर था, जिससे तरुण के भाई अरुण ने पुलिस को सूचना दी। यह देख तरुण बेहोश हो गया था, उसकी तबियत बिगड़ गई थी।
मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू की तो घर से कोई कीमती सामान चोरी नहीं हुआ था। सामान भी इस प्रकार से बिखरा था कि किसी ने फेंका हो। इसके अलावा मौके पर बुलाए गए डॉग स्क्वॉड के डॉग को सजनी का दुपट्टा सुंघाने पर और तीन बार तरुण को अलग-अलग जगह खड़ा करने के बावजूद भी जांच में डॉग तरुण के पास जाकर रुकता था। जिससे तरुण पर शंका गहरा गई थी। लेकिन सजनी का अंतिम संस्कार बाकी होने से और तरुण की तबियत भी खराब होने से उस दिन उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। उसे अगले दिन सुबह थाने में हाजिर होने को कहा था। इसी बीच वो सरखेज पुलिस को चकमा देकर अहमदाबाद से भाग निकला। जांच में प्रेम प्रकरण की बात सामने आने और दहेज उत्पीडऩ के सबूत हाथ लगने पर तरुण के भाई अरुण, भाभी रूपकांता, पिता के.जीनराज और मां अनम्मा को गिरफ्तार कर लिया गया था। तरुण फरार था। उसकी तलाश की जा रही थी। टेक्निकल सर्विलेंस के आधार पर तरुण के सात साल पहले बैंग्लुरू में होने के सबूत मिले थे। लेकिन पहचान और जगह सुनिश्चित नहीं हो पा रही थी। इस बीच इसका भी पता लग जाने पर 24 अक्टूबर को उसे बैंग्लूरु से पकड़ लिया।
मित्र के नाम से कागजात बनाकर बदली पहचान
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में तरुण ने कबूला कि वो अहमदाबाद से भागा। पत्नी सजनी के नाम के एटीएम कार्ड से पैसे निकाले। यहां से ट्रेन से सूरत गया। वहां से प्रेमिका को फोन कर घटना बताई, वो काफी नाराज हुई। जिससे वो सूरत से बैंग्लूरु चला गया। दो दिन वहां रुकने के बाद दिल्ली गया। तरुण नाम से रुकने पर पकड़े जाने का डर था, जिससे उसने उसके स्कूल काल के भोपाल निवासी मित्र प्रविण भाटेले के नाम से खुद की पहचान बतानी शुरू की। फिर कॉलेज की वेबसाइट से प्रविण का फोटो लिया। फोटोशॉप की मदद से प्रविण भाटेले के नाम के कागजात पर अपना फोटो लगाकर फर्जी पहचान-पत्र बनाया। उसके जरिए पांच साल तक दिल्ली के एक कॉल सेंटर में नौकरी की। फिर कंपनी ने पूणे में ब्रांच खोली तो वहां भेज दिया। वहां काम करने वाली युवती से प्रेम होने पर उससे विवाह कर लिया। अभी उसके दो संतान हंै। पूणे में तीन साल नौकरी के बाद बैंग्लूरू में डेल कंपनी में नौकरी लगी। वहां पत्नी-बच्चों के साथ रह रहा था। फिलहाल ओरेकल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में सीनियर मैनेजर है।
यूं दिया हत्या को अंजाम
तरुण मास्टर ऑफ फिजीकल एजूकेशन की डिग्री धारक है। वो डिग्री करने के बाद अहमदाबाद में रहने वाले उसके भाई अरुण के पास रहने आ गया और यहां जे.जी.कॉलेज ऑफ कॉमर्स में फिजीकल एजूकेशन लेक्चरर बन गया। वो बास्केट बॉल का भी अच्छा खिलाड़ी था। बास्केट बॉल खेलने आने वाली एक युवती के साथ उसे प्रेम हो गया। दोनों के संबंध आगे भी बढ़े। लेकिन प्रेमिका के परिजन जाति के बाहर विवाह करने का विरोध कर रहे थे। उधर तरुण के माता-पिता विवाह के लिए दबाव डाल रहे थे, जिससे तरुण ने माता-पिता के दबाव में आकर सजनी से विवाह कर लिया था। विवाह के बाद झगड़े शुरु हुए, प्रेमिका तरुण से सिर्फ बातचीत के संबंध रखने लगी थी। इससे परेशान तरुण ने सोचा कि यदि वो पत्नी सजनी की हत्या कर देगा तो उसकी प्रेमिका उसे फिर से अपना लेगी। उसके साथ भागकर विवाह कर लेगा। यही सोचकर उसने 14 फरवरी २००३ को सजनी की बोपल भव्य पार्क स्थित हीरा पन्ना फ्लैट स्थित मकान में हत्या कर दी। सामान भी बिखेर डाला ताकि यह एहसास कराया जा सके कि हत्या चोरी या लूट के इरादे से की गई है।