
भगवान सोमनाथ की गृहनगरी की शोभा बढ़ा रहा श्रीराम का मंदिर
राजेश भटनागर/भास्कर वैद्य
अहमदाबाद/प्रभास पाटण. गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में प्रभास पाटण स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के सानिध्य में श्री राम मंदिर का निर्माण करवाया गया है। मंदिर में राजस्थान के भरतपुर जिले के बंशी पहाड़पुर के पत्थरों, अजमेर जिले के मकराना के मार्बल का उपयोग किया गया है। भगवान श्री राम ने प्रभास पाटण में त्रिवेणी संगम में अपने पिता पूर्व राजा दशरथ के मोक्ष के लिए श्राद्ध किया था।
पितृ तर्पण किया था। मंदिर में साल भर में देश-विदेश के करीब 35 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
सोमनाथ ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष केशुभाई पटेल, पूर्व ट्रस्टी सचिव प्रवीण कुमार लहरी के प्रयासों और दानदाता दुबई निवासी सरस्वती सिंह आनंद सिंह के 1.35 करोड रुपए के सहयोग से कुल 15 करोड़ रुपए की लागत से यह मंदिर बनाया गया। अरब सागर के तट पर स्थित भगवान सोमनाथ मंदिर से करीब 1 किलोमीटर दूर त्रिवेणी संगम के समीप श्री राम मंदिर का निर्माण कार्य 2014 में 6 फरवरी को शुरू हुआ। श्री सोमनाथ ट्रस्ट का ट्रस्टी जे डी परमार व सोमनाथ मंदिर के पुजारी धनंजय दवे ने मंत्रोच्चार के साथ भूमि पूजन किया था। 2017 में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद दशहरे के दिन मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। उसी दिन मंदिर का उद्घाटन कथाकार मोरारी बापू ने किया था।
मंदिर में प्रथम मंजिल पर सभा मंडप में भगवान श्री राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान की सफेद मार्बल से बनी मूर्तियां हैं। साथ ही गणपति मंदिर, हनुमान मंदिर भी है। भूतल पर पर एक बड़ा सत्संग हॉल बनाया गया है। हॉल में भक्तजन कथा, प्रवचन, सत्संग, व्याख्यान, धार्मिक कार्य आदि कर सकते हैं।
मंदिर में घुमट, शिखर, झरोखे, जाली आदि लगाए गए हैं। मंदिर का निर्माण एक निजी कंपनी ने किया था। मंदिर में भूतल पर आधुनिक तकनीक से सुविधाओं के साथ संकीर्तन हाल में 260 व्यक्तियों के बैठने की व्यवस्था है। संतों-महंतों, अतिथियों व कलाकारों के कमरों की व्यवस्था भी है। आकर्षक रंग-बिरंगी लाइटिंग की व्यवस्था की गई है। मंदिर में प्रवेश के स्थान पर आकर्षक डिजाइन वाले धनुष गेट के साथ बड़े आकार के द्वारपाल की मूर्तियां भी लगाई हैं। मंदिर परिसर में गार्डन बनाया गया है।
17000 वर्ग फीट जमीन पर बना मंदिर
श्री सोमनाथ ट्रस्ट के परशुराम मंदिर के समीप 17000 वर्ग फीट जमीन पर यह मंदिर बनाया गया है। मंदिर की कुल ऊंचाई 81 फीट, मुख्य शिखर की ऊंचाई 51 फीट है। मंदिर में कुल 81 खंभे हैं। कुल तीन शिखर प्रसाद गुम्मट हैं। मंदिर के ध्वज दंड की ऊंचाई 18 फीट है। सभा मंडप 4600 फीट में बना है। सभा मंडप व गर्भागृह में फ्लोर एवं दीवार सफेद ऑस्ट्रेलिया मार्बल से सुशोभित की गई है। सभा मंडप व मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार की चौकी पर सफेद मार्बल सफेद के साथ राजस्थान के रंग-बिरंगे पत्थर का उपयोग किया गया है। मंदिर के खंभों पर विविध देवताओं की 31 मूर्तियां बनाई गई हैं। मंदिर की खिड़कियों दरवाजा पर सागवान की लकड़ी का उपयोग कर धार्मिक चिन्ह बनाए हैं। मंदिर में 57 तोरण कमान हैं। मंदिर में प्रदक्षिणा करते समय त्रिवेणी संगम, समुद्र किनारे स्थित सोमनाथ मंदिर, भालका तीर्थ, सूर्य मंदिर, गीता मंदिर के दर्शन भी किए जा सकते हैं। मंदिर में दिव्यांगों बुजुर्गों के लिए लिफ्ट भी लगाई गई है।
भगवान श्री राम ने प्रभास पाटण क्षेत्र में स्थित त्रिवेणी संगम पर अपने पिता पूर्व राजा दशरथ के मोक्ष के लिए श्राद्ध किया था। इस कारण भगवान राम के चरण कमल जिस स्थान पर पड़े, उस पवित्र भूमि पर भगवान श्री राम का मंदिर बनाया गया है। हिरण नदी के तट पर कृष्णा गोलोक धाम तीर्थ है, अरबी समुद्र के किनारे भगवान सोमनाथ महादेव का मंदिर है और त्रिवेणी संगम के समीप भगवान राम का मंदिर बनाया गया है। यह तीनों मंदिर एक ही मार्ग पर स्थित हैं।
मंदिर पहुंचने के साधन
मंदिर पहुंचने के लिए सोमनाथ व वेरावल में रेलवे स्टेशन, राजकोट व दीव में हवाई अड्डे, अहमदाबाद सहित राज्य भर से एसटी व निजी बसें उपलब्ध हैं।
Published on:
04 Jan 2024 12:11 am
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