
World Social Media Day: सोशल मीडिया की लत चिंता-हताशा का बड़ा कारण
अहमदाबाद. सोशल मीडिया पर लंबे समय तक बने रहना भी एक आदत है जो चिंता और हताशा का बड़ा कारण भी है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि सोशल मीडिया का बहुत ज्यादा उपयोग से युवा वर्ग में न सिर्फ आत्मविश्वास कम हो रहा है बल्कि अकेलेपन का भी आभास बढ़ रहा है। यही कारण है कि हताशा और चिंता भी बढ़ती है।
शहर के अपोलो अस्पताल की मनोवैज्ञानिक पूजा पुष्कर्णा का कहना है कि पिछले काफी समय से सोशल मीडिया पर वैसे तो सभी वर्गों की सक्रियता बढ़ी है, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित युवा वर्ग हो रहा है। उनका मानना है कि बहुत लंबे समय तक सोशल मीडिया पर बने रहने के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत असर हो रहा है। ऐसे मामलों में 15 से 45 वर्ष आयु के केस अधिक सामने आ रहे हैं। जिसके कारण नींद की कमी के साथ-साथ कार्य की क्षमता भी प्रभावित होती है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर लाइक और व्यू की संख्या का सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर हो रहा है। कम व्यू और लाइक से आत्मविश्वास में कमी और अकेलेपन जैसा महसूस होने लगता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सोशल मीडिया पर साइबर बुलिंग से भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर हो रहा है। कई मामलों में ऑनलाइन बुलिंग का डर और चिंता देखी गई है। इतना ही नहीं युवक आत्महत्या तक कदम उठा लेते हैं। बुलिंग और ट्रॉलिंग के कारण प्रतिष्ठा की चिंता रहती है। सोशल मीडिया के बढ़ते चलन से एक दूसरे से मिलना जुलना भी कम हुआ है। उनका मानना है कि सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा समय देने के बदले परिवार और रिश्तेदारों के साथ मधुर संबंध विकसित करने पर जोर देना चाहिए।
Published on:
29 Jun 2022 10:57 pm
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