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बिछड़ी बेटी मिली तो छलक पड़े आंसू: जबलपुर से लापता युवती अहमदाबाद में मिली

कभी उम्मीद टूटती हुई लगी, तो कभी मां की ममता ने उसे फिर से जोड़ दिया। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के भिटौनी गांव से 11 सितंबर 2025 को लापता हुई 20 वर्षीय युवती आखिरकार अहमदाबाद में मिल गई। यह खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, महीनों से सूनी पड़ी आंखों में फिर से चमक लौट […]

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Ahmedabad news

एआइ फोटो।

कभी उम्मीद टूटती हुई लगी, तो कभी मां की ममता ने उसे फिर से जोड़ दिया। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के भिटौनी गांव से 11 सितंबर 2025 को लापता हुई 20 वर्षीय युवती आखिरकार अहमदाबाद में मिल गई। यह खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, महीनों से सूनी पड़ी आंखों में फिर से चमक लौट आई।

एक मां के लिए बेटी का यूं अचानक गायब हो जाना किसी डरावने सपने से कम नहीं था। दिन-रात तलाश, दर-दर की ठोकरें और हर फोन कॉल में उम्मीद-पर हर बार निराशा ही हाथ लगी। बेटी मानसिक बीमारी से जूझ रही थी, इसलिए चिंता और भी गहरी थी। मां की आंखों से नींद गायब हो चुकी थी और चेहरे की मुस्कान भी कहीं खो गई थी। इसी बीच अहमदाबाद से आई एक खबर ने सब कुछ बदल दिया।दरअसल, 3 नवंबर को शाहीबाग पुलिस को एक युवती गंभीर हालत में मिली। वह इतनी कमजोर थी कि ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी। पुलिस ने तुरंत उसे मानसिक आरोग्य अस्पताल अहमदाबाद में भर्ती कराया।

अस्पताल में डॉक्टरों की टीम-डॉ. चिराग परमार, डॉ. अनीषा बालचंदानी और डॉ. दर्शन-ने उसका इलाज शुरू किया। जांच में सामने आया कि युवती बायपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित है। इलाज और देखभाल के साथ उसकी हालत धीरे-धीरे सुधरने लगी।उधर, अस्पताल के सामाजिक विभागाध्यक्ष अर्पण नायक और पारस राठौड़ ने युवती की पहचान जानने की कोशिश शुरू की। जैसे-जैसे उसकी याददाश्त लौटती गई, वह अपने बारे में छोटी-छोटी बातें बताने लगी। आखिरकार उसने अपने गांव का नाम बताया-और यहीं से परिवार तक पहुंचने की कड़ी जुड़ गई।

मध्यप्रदेश पुलिस के जरिए परिवार से संपर्क

मध्यप्रदेश पुलिस के जरिए परिवार से संपर्क हुआ। जब अस्पताल ने मां को फोन किया, तो वह पल जैसे किसी चमत्कार से कम नहीं था।

फ्रैक्चर हाथ के बावजूद दौड़ी चली आई मां

मां ने बताया कि बेटी की याद ने उसे कभी चैन से बैठने नहीं दिया। हाथ में फ्रैक्चर होने के बावजूद वह तुरंत अहमदाबाद पहुंची। अस्पताल में जब मां-बेटी आमने-सामने हुईं, तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। दोनों एक-दूसरे से लिपटकर देर तक रोती रहीं-यह आंसू दर्द के भी थे और राहत के भी। अब बेटी पूरी तरह सुरक्षित है और मां के साथ अपने घर जबलपुर के लिए रवाना हो चुकी है। हालांकि, एक सवाल अब भी अनुत्तरित है कि 11 सितंबर से 3 नवंबर के बीच युवती कहां रही और अहमदाबाद तक कैसे पहुंची? लेकिन इस सवाल से बड़ी बात यह है कि एक मां को उसकी बेटी मिल गई-और एक बिछड़ा रिश्ता फिर से जुड़ गया।