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पहाडिय़ों पर गीत गुनगुना रहे पत्थर, बिना सहारे खड़ी चट्टानें

पावागढ़-घोघंबा मार्ग पर चेलावाडा के समीप मनमोहक नजारा  

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पहाडिय़ों पर गीत गुनगुना रहे पत्थर, बिना सहारे खड़ी चट्टानें

वडोदरा से पावागढ़-घोघंबा मार्ग पर चेलावाडा के समीप छोटी-छोटी पहाडिय़ों पर स्थित अनेक शिलाएं (पत्थर)।

वडोदरा. साबरकांठा जिले में इडर का पहाड़ (डूंगर) अपनी विशाल चट्टानों के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि गीत गाते पत्थरों को सुनना हो तो इडर तक जाने की आवश्यकता नहीं है। वडोदरा से पावागढ़-घोघंबा मार्ग पर चेलावाडा के समीप छोटी-छोटी पहाडिय़ों पर स्थित अनेक शिलाएं (पत्थर) मानों विख्यात फिल्म निदेशक वी. शांताराम की कल्पना और रामलाल के अविस्मरणीय संगीत को साकार करते हुए गीत गुनगुना रहीं हैं। गीत गया पत्थरों ने..., सांसों पर या तार पर, धडक़न की ताल पर, दिल की पुकार का, रंग भरे प्यार का, गीत गाया पत्थरों ने...। इन पहाडिय़ों पर एक-दूसरे से जुड़ी हुई विशाल चट्टानें वर्षों से बिना किसी सहारे के किसी की प्रतीक्षा करती दिखाई देती हैं। दूर-दूर तक बहती नदी का पर्वत से दिखाई देने वाला नजारा मनमोहक लगता है।
गांव के निवासी आर.एल. राठवा के अनुसार पहाड़ी पर स्थानक करीब 500-700 वर्ष पुराना है। बाद में तलहटी में मंदिर का निर्माण करवाया गया। पहाड़ पर महाकाली का मंदिर है। इसी पहाड़ी से देव नाम की एक छोटी नदी निकलती है। बाबादेव की पहाड़ी से निकलने के कारण नदी का नाम देव नदी पड़ा। माना जाता है कि शिलाओंं का हृदय पिघलने और हर्ष के आंसू झरने के रूप में रैला बनकर बहते हुए आगे जाकर नदी बनते हैं। यह स्थान पत्थरों की खूबसूरती की अनुभूति कराता है।
मध्य गुजरात में देवगढ़ बारिया, रतन महल, छोटा उदेपुर में तेजगढ़ व केवड़ी के समीप स्थित पत्थरों की पहाडिय़ां स्टोन म्युजियम के समान हैं। यह स्थल पत्थरों के पर्यटन स्थल के तौर पर एक नया आयाम बन सकता है। यहां आने वालों का उद्देश्य प्रकृति का आनंद लेने का होना चाहिए। सावधानी से ट्रैकिंग और साहसिक गतिविधियों का यहां आनंद लिया जा सकता है।
सेल्फी लेते समय या फोटो लेते समय विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। एक बार फिर याद कर सकते हैं पत्थरों के गीत की कड़ी... इनमें नहीं है इनसान का भेदभाव, टुकड़े हैं ये एक दिल के, चांदी के राग पर, एकता की तान पर गीत गाया (चेलवाड़ा की पहाडिय़ों मेंं) पत्थरों ने...।

बाबादेव के मंदिर चढ़ते हैं मिट्टी के घोड़े व खिलौने

चेलावाडा आदिवासी समुदायों के प्रकृति के देवता समान बाबादेव का तीर्थधाम है। वडोदरा के अलावा पंचमहाल, छोटा उदेपुर, पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में रहने वाले मुख्य तौर पर राठवा और अन्य आदिवासी समुदायों में पहाड़ी देवता के समान बाबादेव में बहुत आस्था है। पावागढ़-घोघंबा सडक़ मार्ग पर एक पहाड़ी पर बाबादेव का मंदिर है। चारों ओर पत्थरों के बीच में मंदिर में बाबादेव विराजमान हैं। इच्छा पूरी होने पर लोग इस स्थान पर दर्शन करने जाते हैं। बाबादेव की कृपा फलित होने पर मिट्टी के घोड़े चढ़ाने, बकरे-मुर्गे के खिलौने व अन्य वस्तुएं चढ़ाने की परंपरा है। बाबादेव का स्थानक (मंदिर) काफी पवित्र स्थान माना जाता है। सौजन्य : सूचना (माहिती) विभाग, वडोदरा।