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झोला छाप चिकित्सकों पर दबिश, दो क्लीनिक सील

एक के पास नहीं थी किसी तरह की डिग्री

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Two fake Doctor caught, clinic seals

झोला छाप चिकित्सकों पर दबिश, दो क्लीनिक सील

अहमदाबाद. शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में बिना डिग्री के चिकित्सक की प्रेक्टिस करने पर मंगलवार को दो क्लीनिक सील कर दिए गए। इनमें से एक चिकित्सक के पास तो किसी तरह की डिग्री ही नहीं थी तो दूसरा होम्योपेथिक की डिग्री पर एलोपेथिक की प्रेक्टिस करता पाया गया।
अहमदाबाद शहर के दक्षिण जोन में मणिनगर क्षेत्र के मिल्लतनगर स्थित इमामुद्दीन निजामुद्दीन पठान के क्लीनिक पर जांच की गई। मनपा के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भाविन सोलंकी ने बताया कि चिकित्सक की प्रेक्टिस कर रहे इस शख्स के पास किसी तरह की डिग्री नहीं मिली। जिससे उसके क्लीनिक को सील कर दिया गया। मनपा की टीम ने सोमवार को रामोल के जनता नगर स्थित मदीनानगर में डॉ. देवेन्द्र राजपूत के क्लीनिक की भी जांच की। उस दौरान पाया कि डॉ. देवेन्द्र के नाम से होम्योपेथिक की डिग्री थी और वह एलोपेथिक के आधार पर प्रेक्टिस कर रहा था। जिससे डॉ. राजपूत के क्लीनिक क भी सील कर दिया गया। मनपा के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सोलंकी ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से पिछले काफी दिनों से यह कार्रवाई की जा रही है। आगामी दिनों में भी झोलाछाप चिकित्सकों के यहां दबिश दिए जाने का सिलसिला जारी रहेगा।
दसवीं तक पढ़े अधेड़ को चिकित्सक की प्रेक्टिस करते पकड़ा
एसओजी पुलिस ने की दवाइयां जब्त
राजकोट. स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) पुुलिस ने मंगलवार को शहर के शिवनगर सोसायटी के निकट से दसवीं तक पढ़े शख्स को चिकित्सक की प्रेक्टिस करते हुए पकड़ लिया। आरोपी को कंपाउंडर का अनुभव था।
राजकोट शहर में ग्रीनलेंड चौकड़ी के निकट स्थित शिवनगर सोसायटी में शेरी नंबर ३/४ में एक क्लीनक पर मंगलवार को एसओजी पुलिस ने छापा मारा। पुलिस निरीक्षक एच.एम. राणा के नेतृत्व में की गई कार्रवाई के बाद पता चला कि क्लीनिक का चिकित्सक दसवीं तक पढ़ा है। बिना किसी आधिकारिक डिग्री के वह चिकित्सक की प्रेक्टिस कर रहा था। पुलिस के अनुसार कोठारिया रोड स्थित राधेश्याम सोसायटी निवासी मनसुख रवजी वघासिया नामक अधेड़ को गिरफ्तार किया गया है। मनसुख दसवीं तक पढ़ा था, जो पिछले तीन माह से बतौर चिकित्सक की प्रेक्टिस कर रहा था। पुलिस ने उसके क्लीनिक से छह हजार की नकदी व कुछ दवाइयां जब्त भी की हैं। पूछताछ में पता चला है कि मनसुख दसवीं तक पढ़ा था और पिछले कुछ वर्ष उन्होंने अलग-अलग अस्पतालों में कंपाउंडर की नौकरी की थी। जिससे उसे कंपाउंडर का अनुभव था। इसके बाद उसने यहां क्लीनिक शुरू कर दिया था और यहां वह चिकित्सक बन कर मरीजों का उपचार करने लग गया था।