Ahmedabad: महानगरपालिका (मनपा) ने इस वर्ष वैदिक पद्धति से होली उत्सव को बड़े पैमाने पर मनाने की घोषणा की है। 2026 में शहर के सातों ज़ोन में कुल 101 स्थलों पर वैदिक होली का आयोजन होगा। इसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन कम करना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना है।मनपा के अनुसार होलिका दहन में अब लकड़ी का उपयोग नहीं होगा। इसके स्थान पर गाय के गोबर से बनी स्टिक और टिक्की का प्रयोग किया जाएगा। यह पहल 2024 में शुरू हुई थी, जब 11 स्थानों पर वैदिक होली मनाई गई थी। 2025 में इसे बढ़ाकर 42 स्थलों तक किया गया। अब 2026 में इसे 101 स्थलों तक विस्तारित किया गया है।
होली किट और गऊ सेवामनपा के पशु उपद्रव नियंत्रण विभाग (सीएनसीडी) के अध्यक्ष नरेश राजपूत के अनुसार गाय के गोबर से बनी स्टिक के बॉक्स तैयार किए जा रहे हैं। इन्हें 2,500 रुपए के टोकन और गऊ सेवा दान की रसीद के साथ संबंधित सोसायटी या धार्मिक संस्थानों तक पहुंचाया जाएगा। होली से एक-दो दिन पहले इनकी डिलीवरी की जाएगी।
पिछले वर्ष 4,800 किलो गोबर की स्टिक और 8,500 टिक्की धार्मिक संस्थानों में उपलब्ध कराई थीं।गोबर से बने उत्पादों का उपयोग हवन, यज्ञ, खाद, ऑर्गेनिक खेती, बायोगैस और अन्य ऊर्जा विकल्पों में किया जा रहा है। मनपा की ओर से गौशालाओं में तैयार खाद का उपयोग शहर के 250 गार्डन और नर्सरी में किया जा रहा है।