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Gujarat Save Water : सूखे कुएं और बंद बोरवेल को रिचार्ज कर रहे ग्रामीण

बनासकांठा जिले में बरसाती जल संग्रह की अनूठी मुहिमवडगाम तहसील के टींबाचुडी गांव के निवासियों की पहल

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Gujarat Save Water : सूखे कुएं और बंद बोरवेल को रिचार्ज कर रहे ग्रामीण

Gujarat Save Water : सूखे कुएं और बंद बोरवेल को रिचार्ज कर रहे ग्रामीण

पालनपुर. खेती और पशुपालन आधारित बनासकांठा जिले में भूमिगत जल भंडार को समृद्ध बनाने के लिए ग्रामीणों ने कमर कसी है। जिले की वडगाम तहसील के टींबाचुडी गांव के लोगों ने बरसाती पानी को जमीन के नीचे ले जाने के लिए क्षेत्र के कुओं को रिचार्ज करना शुरू किया है। ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से यहां के 30 कुओं को रिचार्ज किया गया है। बारिश की शुरुआत के साथ गांव में कई जगहों पर भूमिगत जल स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए निर्माण किया गया है।

राज्य सरकार की ओर से हर साल मानसून से पूर्व सुजलाम-सुफलाम जल संचय अभियान चला कर तालाबों के गहरीकरण, नदियों के प्रवाह साफ करने समेत अन्य काम किए जाते हैं। इसी के तहत टींबाचुडी गांव के लोगों ने सरकारी सहायता लेकर अपने गांव और आसपास के क्षेत्रो के कुएं को रिचार्ज करने का बीड़ा उठाया। गांव के अग्रणी केशर चौधरी ने बताया कि हमलोगों के गांव में कुल एक हजार बीघा खेती की जमीन है। वहीं 270 बीघा गोचर की जमीन है। यहां के लोगों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन और खेती है। गांव में सिंचाई के पानी की दिक्कत की वजह से लोगों को गेहूं खरीदी कर लाना पड़ता है। सिंचाई, खेती और पशुपालन के लिए पर्याप्त पानी के लिए बरसाती पानी के संग्रह कर भूमिगत जल संग्रहण करने की जरूरत महसूस हुई। इसके तहत खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में और बांध का पानी बांध में रहे, इसके लिए सरकार के जल संचय योजना के तहत बरसाती पानी संग्रह करने का सामूहिक प्रयास शुरू हुआ। गांव के अग्रणियों और वरिष्ठजनों ने टीम बनाकर जल संचय को लेकर ग्रामीणों में जागरुकता की।

प्रशासन ने दी पांच लाख रुपए की ग्रांट
बनासकांठा जिला कलक्टर ने ग्रामीणों के प्रयास को आगे बढ़ाते हुए प्रशासन की ओर से विशेष पांच लाख रुपए का आवंटन किया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने भी ढाई लाख रुपए की सहयोग राशि मिलाई। इससे कुल साढ़े सात लाख रुपए जमा हो गए।
इस राशि का उपयोग गांव में जल संचय के लिए जरूरी स्ट्रक्चर का निर्माण कार्य पूरा किया गया। इस निर्माण के जरिए 1 से 20 इंच तक बारिश में 1.5 करोड़ लीटर पानी जमीन के नीचे जमा हो होगा। इसके साथ ही बारिश का पानी जमीन में संग्रहित करने के लिए पुराने और बेकार कुएं, बंद हो चुके ट्यूबवेल में जरूरी व्यवस्था की गई। इससे कुएं और ट्यूबवैल भी रिचार्ज होने शुरू हो गए। इस कार्य में गांव के युवा भी जुड़ जिससे वे दूसरे गांवों में जाकर ग्रामीणों को सूखे कुएं और ट्यूबवैल को रिचार्ज करने की पद्धति से अवगत कराने लगे।
टींबाचुडी गांव के अग्रणी नटु प्रजापति ने बताया कि हमारे गांव में पानी की कमी है, इसलिए जल संग्रह के दृघकालीन उपाय से सभी काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1980 में पांडुरंग शास्त्री के बताए मार्ग पर चल कर ग्रामीण प्रकृति के निकट होकर सभी काम करते हैं। इसके तहत गोचर में सीडबॉल बनाकर पौधरोपण, जल संचय समेत अन्य प्रकल्प शामिल हैं।
कुएं-बोरवेल के रिचार्ज में 20-25 हजार का खर्च
ग्रामीण बताते हैं कि एक बोरवेल रिचार्ज करने में 20 से 25 हजार रुपए का खर्च होता है। इसमें बरसाती पानी को सीधे कुएं में नहीं जाने दिया जाता है, बल्कि इसके पहले उसके शुद्धिकरण के लिए कुंडी के अंदर रेत, कपची, कंकड़ और दो एसएस जाली का उपयोग किया जाता है। जरूरत होने पर चारकोल का भी इस्तेमाल किया जाता है।