चॉकलेट, पाउडर, दूध की बिक्री है जारी अब घी, पनीर व आइस्क्रीम बनाने की भी योजना
भुज. गुजरात की सरहद डेयरी (कच्छ जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड) ने दूध बाजार में एक अनूठी पहल की है। डेयरी ने बाजार में केसर फ्लेवर वाला ऊंटनी का दूध उतारा है। इसे ‘अमूल कूल कैमल मिल्क केसर’ नाम दिया गया है।
शनिवार को आणंद में अमूल फैडरेशन के अध्यक्ष शामल पटेल, उपाध्यक्ष सह सरहद डेयरी के अध्यक्ष वालमजी हुंबल, फैडरेशन के प्रबंध निदेशक जयेन महेता ने दूध संघों के प्रबंध निदेशकों व विपणन प्रबंधकों की मौजूदगी में इसे बाजार में उतारा।
सरहद डेयरी के अध्यक्ष हुंबल के अनुसार ऊंटनी का दूध स्वास्थ्य के लिए काफी बेहतर होता है। इतना ही नहीं ऊंट पालकों के आर्थिक व सामाजिक विकास में भी यह काफी मददगार साबित होगा। इससे पहले कैमल मिल्क चॉकलेट, पाउडर, दूध को बाजार में उतारा जा चुका है। उसे मिल रहे बेहतर प्रतिभाव को देखते हुए अब केसर फ्लेवर वाला ऊंटनी का दूध बाजार में उतारा है। डेयरी की ओर से ऊंटनी के दूध से घी, पनीर व आइस्क्रीम भी बनाकर बेचने की तैयारी की जा रही है।
कच्छ में 17 हजार ऊंटनियों का रोजाना 4500 लीटर दूध होता है संग्रहित
हुंबल के अनुसार कच्छ जिले में 17 हजार ऊंटनियां हैं। वर्तमान में रोजाना 4500 लीटर दूध 51 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से सरहद डेयरी में संग्रहित होता है। पिछले साल औसतन 3700 लीटर दूध किया और पशुपालकों को 7 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। इस साल औसत दैनिक दूध संग्रह बढक़र 4400 लीटर हो गया है। ऊंट पालकों को अनुमानित रूप से 8 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा। इससे ऊंट पालकों का जीवन स्थायी एवं आर्थिक व सामाजिक रूप से विकसित हुआ है।
8 करोड़ से स्थापित किया प्लांट
कच्छ जिले के अंजार स्थित सरहद डेयरी के मुख्यालय की ओर से वर्ष 2019 में 8 करोड़ रुपए से ऊंटनी के दूध का प्लांट स्थापित किया गया है। इसकी प्रतिदिन की क्षमता 20 हजार लीटर की है। सरहद डेयरी की ओर 2018 में ऊंटनी के दूध से चॉकलेट बनाने की शुुरुआत की गई थी।
देशभर में दिलाई नई पहचान
ऊंटनी के दूध ने सरहद डेयरी को पूरे भारत में एक नई पहचान दिलाई है। ऊंट पालकों को उच्चतम रिटर्न के लिए उचित मूल्य पर सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले उत्पाद और अभिनव उत्पादों के माध्यम से सर्वश्रेष्ठ अमूल मॉडल प्रदान करके उपभोक्ताओं का विश्वास जीता है।