
Now campaign to find TB patients will run in villages
ओम प्रकाश शर्मा
अहमदाबाद. वैसे तो टीबी (क्षय) रोग के 70 फीसदी मामले फेफड़े संबंधित होते हैं लेकिन यह ऐसा रोग है जो शरीर के कई भागों में भी फैल सकता है। चिकित्सकों की मानें तो यह बीमारी किडनी (गुर्दे) में भी पाई जाती है। समय पर उपचार नहीं कराने पर यह रोग किडनी को भी खराब कर सकता है।
अहमदाबाद स्थित सिविल मेडिसिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजिस एंड रिसर्च सेंटर (आईकेडीआरसी) के नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी रोग विशेषज्ञ) प्रोफेसर डॉ. दिव्येश इन्जीनियर का कहना है कि एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी के मामले भी खूब मिलते हैं। उनके अनुसार आमतौर पर 70 फीसदी मामले फेफड़े (पल्मोनरी) की टीबी के होते हैं, जबकि 30 में से चार से पांच फीसदी मामलों में किडनी की टीबी हो सकती है।
यह हैं लक्षण
किडनी की टीबी के लक्षण में मूत्र में खून आना, बुखार आना और वजन कम हो जाना है। समय रहते यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो किडनी खराब होने की नौबत आ सकती है। उनका कहना है कि टीबी से खराब हो गई किडनी के बाद अस्पताल में प्रत्यारोपण भी किए गए हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों का उपचार हो जाता है।
तब जांच कराना जरूरी
यदि किसी को दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी है तो उसे टीबी की जांच करानी जरूरी है। राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में इसकी जांच निशुल्क की जाती है। विशेषज्ञ के मुताबिक यदि टीबी का मरीज दो सप्ताह या अधिक दिनों तक दवाई ले चुका है तो उससे फैलने वाले संक्रमण की आशंका कम हो जाती है। यदि समय रहते टीबी के मरीज का उपचार शुरू नहीं होता है तो एक मरीज 15 से 20 लोगों को संक्रमित कर सकता है। इतना ही नहीं टीबी की दवाइयां बीच में छोडऩे पर भी मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) टीबी का भी सामना करना पड़ सकता है जो काफी खतरनाक स्थिति होती है।
प्रति मिनट एक मौत
आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रति मिनट टीबी से एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। यह आंकड़ा मलेरिया, डेंगू और एड्स जैसे रोगों से होने वाली मौतों से काफी अधिक है।
गुजरात में टीबी के 1.15 लाख मरीज
गुजरात में टीबी के कुल मरीजों (पल्मोनरी एवं एक्सट्रा पल्मोनरी) की संख्या 115344 बताई गई है। टीबी शरीर के किसी भाग में असर कर सकती लेकिन मुख्य रूप से इसके ज्यादा केस फेफड़े संबंधित होते हैं। फेफड़े के अलावा अन्य भागों में पाई जाने वाले टीबी को एक्सट्रा पल्मोनरी के नाम से जाना जाता है। टीबी का सबसे बड़ा लक्षण खांसी (पल्मोनरी) है।
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समय रहते टीबी की पहचान हो तो आसानी से उपचार संभव है। देर होने पर यह बीमारी घातक भी हो सकती है।
डॉ. विनीत मिश्रा, निदेशक, आईकेडीआरसी
Published on:
23 Mar 2022 10:30 pm
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