
admission in law college
अजमेर. प्रदेश के लॉ कॉलेज (law college ajmer) में प्रथम वर्ष के प्रवेश अभी तक अटके हुए हैं। सत्र 2019-20 की शुरुआत हुए ढाई महीने बीत चुके हैं।
बार कौंसिल ऑफ इंडिया (bar council of india) ने प्रवेश की मंजूरी नहीं दी है। लेटलतीफी का खामियाजा विद्यार्थी भुगत रहे हैं। इनमें अजमेर (ajmer) सहित नागौर (nagaur), सीकर (sikar), सिरोही (sirohi), बूंदी (bundi) और अन्य लॉ कॉलेज शामिल हैं। शिक्षकों और संसाधनों की कमियां पूरा करने के लिए सरकार ने पिछले सत्र में बीसीआई (BCI) को अंडर टेकिंग दी थी। यह परेशानियां अब तक कायम हैं। कमियां पूरी हुए बिना बीसीआई प्रवेश (admission) की मंजूरी देने को तैयार नहीं है।
राज्य में सरकारी लॉ कॉलेज : 15
कॉलेज की स्थापना : 2005-06
पूर्व की स्थिति-सातों संभाग के बड़े कॉलेज में थे विधि विभाग
सरकारी विश्वविद्यालय जिनसे सम्बद्ध है कॉलेज-27
बार कौंसिल ऑफ इंडिया का गठन-एडवोकेट्स एक्ट 1961
राजस्थान में विधि शिक्षा में अध्ययनरत स्टूडेंट्स-10 हजार
सरकार से अनुदान : किसी कॉलेज को नहीं
विधि संकाय में कार्यरत शिक्षक-130
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अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव पर ‘संकट ’
लॉ कॉलेज के तीन पदाधिकारियों को जबरदस्त झटका लगा है। यहां अध्यक्ष और महासचिव एलएलबी द्वितीय वर्ष तथा उपाध्यक्ष प्रथम वर्ष के एक-एक पेपर में अनुत्तीर्ण हो गए हैं। लिंगदोह समिति (lingdoh committee) के नियमानुसार तीनों के पदों पर संकट मंडरा गया है। कॉलेज प्रशासन नियमों (rules) का अवलोकन और कॉलेज शिक्षा निदेशालय (director college education) के निर्देशानुसार कार्रवाई करेगा।
यूं हुए थे चुनाव
लॉ कॉलेज में बीते 27 अगस्त को छात्रसंघ चुनाव (student union election) हुए थे। इसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (abvp) के हिमांशु चौहान अध्यक्ष, अनिल कुमावत उपाध्यक्ष, निखिल कसोटिया महासचिव और दीपक सेन संयुक्त सचिव नियुक्त हुए। इनके खिलाफ रामकिशोर जाजड़ा ने अध्यक्ष, फैसल खान ने उपाध्यक्ष, कुलदीप सैन ने महासचिव और अनिल गुर्जर ने संयुक्त सचिव पद बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ा था।
Updated on:
23 Sep 2019, 9:45 AM IST
Published on:
23 Sep 2019, 9:45 AM IST
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