
डीआईजी ऑफिस के पीछे थाने से चंद कदम की दूरी पर हो रही अवैध वसूली
दिलीप शर्मा/अजमेर. कलक्ट्रेट कार्यालय परिसर अघोषित पार्र्किंग हब में तब्दील होता जा रहा है। परिसर में जहां-तहां दुपहिया और चारपहिया वाहनों की बेतरतीब पार्र्किंग से पैदल चलना भी दुश्वार जाता है। परिसर में चहुंओर वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है। इससे कई बार अधिकारियों के वाहन भी यहां फंस जाते हैं। खासकर दुपहिया वाहनों की रेलमपेल भी पूरे दिन लगी रहती है। वाहनों के जमावड़े के बीच लोगों का चलना फिरना तक मुश्किल हो रहा है।
रोजाना निजी कामों से आने वाले लोगों, सरकारी बैठकों में जिले भर से आने वाले जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के वाहनों का प्रवेश तो यहां कोढ़ में खाज का काम करता है। वहीं अन्य प्रशासनिक व अदालतों के कार्यालय होने के कारण यहां वाहनों का रैला लगा रहता है। यहां तक कि वाहन कलक्ट्रेट परिसर के बाहर, जयपुर रोड, नीति मार्ग, अजमेर क्लब के सामने व एसबीआई के सामने तक खड़े रहते हैं जिससे मुख्य मार्गों का यातायात भी बाधित होता है।
कलक्ट्रेट परिसर में हैं कई कार्यालय
कलक्ट्रेट परिसर में वाहनों का जमावड़ा रहने की प्रमुख वजह परिसर में अलग-अलग कार्यालय हैं। इनमें रसद विभाग, कोषालय, पेंशन विभाग, पुलिस अधीक्षक कार्यालय व संबंधित कार्यालय, उपखंड अधिकारी कार्यालय, तहसील कार्यालय, पेंशन विभाग, पुलिस कंट्रोल रूम अभय कमांड सेंटर, उपभोक्ता मंच, नागरिक सुरक्षा, होमगार्ड कम्यूटर सेंटर निक सहित विभिन्न कार्यालय हैं। इन कार्यालयों के स्टाफ, अधिकारी व यहां काम से आने वाले लोगों के वाहन आदि की आवाजाही बनी रहती है। इसी प्रकार पुराने लोक सेवा आयोग भवन के रास्ते भी कलक्ट्रेट परिसर में खुलते हैं। इस भवन में एमएसीटी अदालत, पारिवारिक न्यायालय, एसीबी कोर्ट, न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या चार की अदालत, एसीबी कार्यालय आदि का स्टाफ भी अपने वाहन जयपुर रोड और कलक्ट्रेट परिसर में खड़े कर देते हैं। इन दफ्तरों में आने वाले लोगों, पक्षकारों व वकीलों के वाहनों की भी रोजाना आवाजाही बनी रहती है।
बैठकों व प्रदर्शन से हाल और बेहाल
कलक्ट्रेट परिसर में सरकारी बैठकों में जिले भर से जनप्रतिनिधि, अधिकारी आते हैं। इन सभी के वाहनों का भी यह जमावड़ा लगने से परिसर वाहनों से अट जाता है। माह में कम से कम 15 से 20 दिन कोई न कोई सरकारी बैठक कलक्ट्रेट में होती रहती हैं। इसी प्रकार आए दिन कलक्ट्रेट के बाहर राजनीतिक या सामाजिक प्रदर्शन के दौरान भी आवाजाही प्रभावित होती है। लोगों को अपने वाहन बाहर खड़े रखकर अंदर आना पड़ता है।
विकल्प सिर्फ बेसमेंट पार्र्किंग
कलक्ट्रेट परिसर में वाहनों के खड़े करने की समस्या का भूमिगत पार्र्किंग के अलावा कोई उपचार नजर नहीं आता। प्रशासनिक अधिकारियों की माने तो उनका कहना है कि वाहनों को बाहर रोकने में तय नहीं हो पाता कि किसे आने दिया जाए किसे रोका जाए। बाहर रोकने पर सैशन कोर्ट जैसे हालात हो जाएंगे। वहां हाइवे पर भी वाहन खड़े होते हैं और कोर्ट परिसर भी वाहनों से भरा रहता है। ऐसे में इन दोनों स्थानों पर ही बेसमेंट पार्र्किंग के अतिरिक्त कोई उपचार नहीं है।
Published on:
28 Aug 2018 12:48 pm
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