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Ajmer Dargah News : यहां जूते-चप्पल का होता है एक्स-रे

यह कोई अस्पताल नहीं बल्कि ख्वाजा साहब की दरगाह है। यहां 2007 बम ब्लास्ट के बाद सुरक्षा के लिए दो एक्स-रे बैगेज मशीन खरीदी गई। इन मशीन का काम जायरीन के सामान का एक्स-रे कर अंदर प्रवेश देने का है लेकिन इन दिनों इन मशीनों में जूते-चप्पल रखे जा रहे हैं।

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Ajmer Dargah News : यहां जूते-चप्पल का होता है एक्स-रे

Ajmer Dargah News : यहां जूते-चप्पल का होता है एक्स-रे

अजमेर. ख्वाजा साहब की दरगाह का प्रबंध संभालने वाली दरगाह कमेटी के इंतजाम नाकाफी होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि जायरीन को जूते-चप्पल रखने तक के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिल रहा। ऐसे में जायरीन कहीं जूते-चप्पल उतार कर जाता है तो वापसी में उसे उसके जूते-चप्पल मिल पाना मुश्किल है।

एक्स-रे मशीन में रखे जा रहे जूते-चप्पल

दरगाह में सुरक्षा व्यवस्था के लिये एक्सरे-बैगेज मशीन खरीदी गई थी। पिछले काफी समय से यह मशीन खराब पड़ी है। इसे दरगाह परिसर में ही एक कोने में कबाड़ की तरह रख दिया गया है। अब यह मशीन जायरीन के जूते-चप्पल उतारने के काम आ रही है।
इसके अलावा दरगाह परिसर में कई जगह जूते चप्पल बिखरे पड़े रहते हैं। दरगाह कमेटी की तरफ से केवल बाबुल शरीफ गेट पर जूते-चप्पल रखवाने के लिए ठेका दिया गया है। लेकिन यहां जगह कम होने के कारण सभी लोग जूते-चप्पल नहीं रख पाते। कमेटी ने अकबरी मस्जिद के पास एक स्टैंड बनाया लेकिन यहां के हालात खराब हैं। लोगों का मानना है कि पवित्र मस्जिद के पास इस तरह की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।


सुलभ कॉम्प्लेक्स पर ताले
दरगाह कमेटी की ओर से संचालित सुलभ कॉम्पलेक्स और क्लॉक रूम रात 8 बजे बंद कर दिया जाता है। इससे भी जायरीन को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात 8 बजे बाद जायरीन को सुविधा के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।

पीने के पानी की भी कमी

जायरीन के लिए दरगाह परिसर में कुछ जगह वाटर कूलर लगाए गए हैं लेकिन लाखों जायरीन के बीच यह व्यवस्था नाकाफी है। दरगाह परिसर में जायरीन के लिए पीने के पानी की सुविधा को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।


नाजिम नहीं रहते अजमेर में
दरअसल केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय ने दरगाह नाजिम का अतिरिक्त कार्यभार शादान जेब खान को सौंप रखा है लेकिन उनके पास तीन-तीन प्रभार होने के कारण वह अजमेर में नहीं रह पाते। इस कारण दरगाह की व्यवस्थाओं पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

इनका कहना है

जायरीन के जूते-चप्पल रखने की माकूल व्यवस्था होनी चाहिए। दरगाह के आस-पास अलग-अलग केबिन बनाकर उन्हें जूते-चप्पल आदि के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है। इस संबंध में दरगाह कमेटी से बात की जाएगी।
-वाहिद अंगारा शाह, अंजुमन सचिव
जूते-चप्पल की बात हो या फिर सुलभ कॉम्पलेक्स की। सभी जगह जायरीन को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जायरीन की परेशानी की तरफ दरगाह कमेटी को ध्यान देना चाहिए।
-मोहम्मद इलियास कादरी, पूर्व सदस्य दरगाह कमेटी

जायरीन को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। आगामी 30 मार्च को दरगाह कमेटी की बैठक रखी गई है। इसमें सभी तरह के इंतजामों पर चर्चा की जाएगी। इंतजामों में जहां भी कमी है, उनमें सुधार किया जाएगा।

-अमीन पठान, अध्यक्ष दरगाह कमेटी

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